फर्रुखाबाद:दो बच्चों के बाद मोहम्दाबाद के रमन ने कराई पुरुष नसबंदी, जिले में अब तक पांच पुरुषों ने अपनाया परिवार नियोजन

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 सितंबर 2026 परिवार को सीमित रखने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पुरुषों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ मोहम्दाबाद निवासी रमन ने डॉ. राम मनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में पुरुष नसबंदी कराई। इसके साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में जिले में पुरुष नसबंदी कराने वालों की संख्या पांच हो गई है।

रमन ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं और अब वह परिवार को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने कहा कि बढ़ते परिवार के साथ खर्चे भी बढ़ते जाते हैं। बच्चों का ठीक से लालन-पालन, अच्छी शिक्षा और बीमारी की स्थिति में इलाज कराना सामान्य नौकरी या मजदूरी करने वाले परिवार के लिए मुश्किल हो जाता है। निजी अस्पताल में प्रसव पर होने वाले खर्च का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन अपनाना आर्थिक रूप से भी काफी राहत देता है।

रमन के मुताबिक, उन्होंने पहले अपनी पत्नी से नसबंदी कराने की बात कही, लेकिन पत्नी इसके लिए तैयार नहीं हुईं। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात वार्ड आया आरती सक्सेना से संपर्क किया। आरती सक्सेना ने उनकी बात पुरुष नसबंदी विशेषज्ञ डॉ. आर.सी. माथुर से कराई। विशेषज्ञ से जानकारी और परामर्श मिलने के बाद दंपति को पुरुष नसबंदी को लेकर भरोसा हुआ और रमन ने स्वयं नसबंदी कराने का निर्णय लिया।

महिलाओं पर ही परिवार नियोजन की जिम्मेदारी क्यों?

परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कटारिया ने कहा कि परिवार नियोजन की बात आते ही अक्सर इसकी जिम्मेदारी महिलाओं पर डाल दी जाती है। पुरुषों में यह भ्रांति भी रहती है कि नसबंदी कराने से उनकी शारीरिक ताकत या क्षमता कम हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं है।

उन्होंने कहा कि महिला के लिए गर्भधारण और प्रसव की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है। एक महिला जब बच्चे को जन्म देती है तो मानो उसका दूसरा जन्म होता है। इसलिए परिवार नियोजन में पुरुषों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आना चाहिए।

जिले में 5 पुरुष और 206 महिलाओं ने कराई नसबंदी

एसीएमओ ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिले में 5 पुरुषों ने नसबंदी कराई है, जबकि अप्रैल 2026 से अब तक लगभग 206 महिलाओं की नसबंदी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

सुरक्षित प्रक्रिया है पुरुष नसबंदी

उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं पुरुष नसबंदी विशेषज्ञ डॉ. अर सी माथुर ने बताया कि पुरुष नसबंदी में शुक्राणु वाहिनी नलिकाओं को बांध दिया जाता है, जिससे शुक्राणु शरीर से बाहर नहीं जा पाते। ये शरीर में ही अवशोषित हो जाते हैं।

उन्होंने बताया कि पुरुष नसबंदी पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है। नसबंदी के बाद एक-दो दिन आराम करना जरूरी होता है। अधिकांश पुरुष दो-तीन दिन बाद अपने सामान्य काम पर लौट सकते हैं। वहीं दौड़ना, वजन उठाना और साइकिल चलाने जैसी शारीरिक गतिविधियां लगभग एक सप्ताह बाद शुरू करने की सलाह दी जाती है।

नसबंदी कराने पर मिलती है प्रोत्साहन राशि

जिला परिवार नियोजन परामर्शदाता विनोद कुमार ने बताया कि मिशन परिवार विकास कार्यक्रम के तहत आने वाले जिलों में पुरुष नसबंदी कराने वाले लाभार्थी को 3,000 रुपये तथा महिला नसबंदी कराने पर 2,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

नसबंदी के लिए दंपति को अस्पताल लाने वाली आशा कार्यकर्ता को पुरुष नसबंदी पर 400 रुपये और महिला नसबंदी पर 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है।

इसके अलावा पीपीआईयूसीडी लगवाने वाली महिला को 300 रुपये और सेवा प्रदाता को 150 रुपये दिए जाते हैं। अंतरा इंजेक्शन अपनाने वाली महिलाओं को 100 रुपये, जबकि उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक लाने वाली आशा कार्यकर्ता को भी 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि परिवार नियोजन को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी न मानकर पुरुषों को भी इसमें बराबर भागीदारी करनी चाहिए, ताकि छोटे और स्वस्थ परिवार की अवधारणा को बढ़ावा मिल सके।

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