फर्रुखाबाद:वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने का संकल्प, शमशाबाद में पंचायत सहायकों व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 05 अगस्त 2026 जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में बुधवार को विकासखंड शमशाबाद सभागार में बाल श्रम उन्मूलन एवं बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख सुषमा वर्मा ने की। इसमें ब्लॉक बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के सदस्य, पंचायत सहायक तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहायक श्रमायुक्त नम्रता सिंह ने बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) से संबंधित कानूनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे से बाल श्रम कराना दंडनीय अपराध है। दोषी नियोक्ता पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा छह माह से दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के वर्ष 2027 तक प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प पर प्रकाश डालते हुए निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित बीओसीडब्ल्यू एवं पीएम-एसवाईएम जैसी योजनाओं की भी जानकारी दी।

जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल चंद्रा ने बच्चों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उपाय बताए। उन्होंने सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से ग्राम बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी जैसे मुद्दों पर जनजागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।

चाइल्ड राइट्स एसोसिएट जीशान अंसारी ने ग्राम पंचायतों को बाल श्रम मुक्त बनाने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने पंचायत सहायकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कामकाजी एवं स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान कर उनकी सूचना श्रम विभाग को उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि उन्हें शिक्षा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा सके। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद एक वर्ष तक निगरानी कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बच्चा दोबारा बाल श्रम की ओर न जाए।

खंड विकास अधिकारी राधेश्याम ने कहा कि बाल श्रम जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सभी विभागों और समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूर रखने और उनसे नियमित संवाद बनाए रखने की सलाह दी।

बाल संरक्षण अधिकारी सचिन सिंह ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को कभी भी अकेला न छोड़ें तथा ग्राम स्तर पर गठित बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की नियमित बैठकें कर कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को चिन्हित कर सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।

कार्यशाला में सहायक विकास अधिकारी (ग्रामीण विकास) संजीव कुमार, चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद अलीम, बाल विकास परियोजना अधिकारी पुष्पा सेन, परामर्शदाता प्रवीण गुप्ता, चाइल्ड हेल्पलाइन काउंसलर ज्योति शर्मा, मनोज गंगवार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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