
आजमगढ़ ब्यूरो :: आजमगढ़ जनपद के अतरौलिया क्षेत्र के ब्लॉक सभागार में ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान द्वारा ब्लॉक सभागार अतरौलिया में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।” और “जलवायु के लिए अभी कार्रवाई” पर केंद्रित है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी आलोक कुमार शामिल थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजदेव चतुर्वेदी ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब सिर्फ वैज्ञानिक चर्चा तक सीमित नहीं हैं। अब ये गांव-गली और खेत-खलिहानों तक महसूस किए जा रहे हैं। हर साल बढ़ते तापमान, लू की तीव्रता और जल संकट ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है। हीट वेव की मार सबसे अधिक उन लोगों पर पड़ रही है जो समाज के सबसे कमजोर तबकों से आते हैं – जैसे कि ईंट भट्ठों में काम करने वाले मजदूर, ठेला चलाने वाले श्रमिक, सफाई कर्मचारी और घरेलू महिलाएं। स्थानीय स्तर पर जलवायु अनुकूलन और शमन के लिए योजना बनाकर, सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करके और जलवायु लचीलापन बढ़ाकर, पंचायती राज संस्थान (पीआरआई) जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और एक अधिक टिकाऊ भविष्य बनाने में मदद कर सकते हैं। डॉ. एलसी वर्मा द्वारा बताया गया कि जलवायु संकट का मुकाबला केवल बड़े शहरों और सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। गांवों की ग्राम पंचायतें यदि चाहें तो स्थानीय स्तर पर योजना बनाकर सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करके और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रयासों के माध्यम से एक निर्णायक बदलाव ला सकती हैं, उत्तर प्रदेश सरकार के खेत बचाओ अभियान के बारे में बताते हुए कहा कि हमे रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग को धीरे धीरे कम करें और कृषि की प्राकृतिक एवं जैविक विधियों को अपनाए, जिसके लिए स्थानीय संस्था ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान के साथी निरंतर लोगों को प्रशिक्षित एवं प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे है। खंड विकास अधिकारी आलोक कुमार ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें यदि जलवायु संकट और प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ ठोस कदम उठाएं, तो न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है, बल्कि अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को अपनी सुविधाओं का सदुपयोग करना चाहिए और दुरुपयोग से बचना चाहिए। कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि हर ग्राम पंचायत अपने स्तर पर प्लास्टिक के प्रयोग को घटाने, वर्षा जल संचयन को बढ़ाने, वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने और स्थानीय समुदाय को जलवायु अनुकूल जीवनशैली के लिए तैयार करने का कार्य प्रारंभ करेगी।कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ आदित्य कुमार, डॉ पवन कुमार आनंद, राजन कुमार, एवं राम चंद्र वर्मा, राजेश वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किया, कार्यक्रम का संयोजन संस्थान के वरिष्ठ साथी राजेश कुमार ने किया।
