RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर के गणेश टेकरी मंदिर में पूजा-अर्चना और गर्भगृह का उद्घाटन किया। इसके बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दुनिया में बढ़ते टकरावों पर अपनी बात रखी। उन्होंने इस समस्या का समधान बताते हुए कहा कि सार्वभौमिक चेतना सभी मनुष्यों को आपस में जोड़ती है। उन्होंने ‘अपनापन’ की भावना को व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवहार का आधार बनाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक दुनिया में मौजूद कई संकट और टकराव इसी भावना को भूलने का परिणाम हैं और अपनापन को मजबूत करना ही इनका वास्तविक समाधान है।
मंदिर परिसर में लोगों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि सार्वभौमिक चेतना हर व्यक्ति में व्याप्त है। भगवान गणेश ऊर्जा के स्रोत हैं और संगठन का सही अर्थ समझाते हैं। हर व्यक्ति इस अपनापन की भावना को सूक्ष्म रूप से जानता है और जुड़ाव महसूस करता है। सच्ची एकता क्या है? हम सभी एक ही ऊर्जा के रूप हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस सार्वभौमिक चेतना को समझ लिया जाए, तो व्यक्ति का खुद के साथ, दूसरों के साथ और पूरी दुनिया के साथ व्यवहार बदल जाता है। आम भाषा में हम इस भावना को अपनापन कहते हैं। अगर इस भावना को सोच-समझकर मजबूत किया जाए और व्यक्ति उसी के अनुरूप अपना व्यवहार करे, तो हमारी दुनिया में बाधाएं नहीं रहेंगी।
