सीतापुर:आखिर ग्राम पंचायत सचिव केशव राना को किसका प्राप्त है संरक्षण , क्यों नहीं हो रही कार्यवाही

मिश्रित, सीतापुर / विकासखंड मिश्रित की ग्राम पंचायत जसरथपुर में तैनात पंचायत सचिव केशव राना की कार्य शैली वर्तमान समय काफी चर्चित चल रही है । उन पर सरकारी कार्यों के संचालन में निजी मुंशियों का सहारा लेने तथा शासन-प्रशासन के निर्देशों की मनमानी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं । जिलाधिकारी डा. राजा गणपति आर द्वारा सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं । कि सरकारी कार्य केवल अधिकृत कर्मचारियों द्वारा ही संपादित कराए जाय। इसके बावजूद आरोप है । कि पंचायत सचिव केशव राना द्वारा निजी मुंशियों को सरकारी कार्यों में लगाया गया है। कथित रूप से ये मुंशी प्रति दिन कार्यालय पहुंचकर परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र तथा दिव्यांग आवास जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निस्तारण करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क के उनके कथित मुंशी कार्य नहीं करते है । वह सीधे कहते कि साहब हमें कोई वेतन नही देते है । हम जो सुविधा शुल्क लेते है । उसी से घर का काम चलता है । ग्राम पंचायत जसरथपुर निवासी 90 प्रतिशत दिव्यांग अमन मौर्य पुत्र अयोध्या प्रसाद मौर्य ने फरवरी 2026 में दिव्यांग आवास योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु अपने अभिलेख पंचायत सचिव को उपलब्ध दिए थे । आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने और कथित मांग पूरी न कर पाने के कारण उनका आवास प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाया गया। पीड़ित का कहना है कि उसने सैकड़ों बार ब्लाक कार्यालय के चक्कर लगाए । लेकिन ब्लाक प्रमुख राम किंकर पांडेय के कई बार कहने पर दिब्यांग के आवास का प्रस्ताव किया गया है । इसी प्रकार जसरथपुर के मजरा फुलवारी निवासी राजेंद्र कुमार मिश्र के अंत्योदय राशन कार्ड संबंधी प्रस्ताव की जांच के लिए ब्लाक प्रमुख रामकिंकर पांडेय द्वारा आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए थे। साथ ही प्रमुख कार्यालय को संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया था। आरोप है । कि एक मांह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पंचायत सचिव द्वारा प्रस्ताव की प्रति प्रमुख कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई है । ग्रामीणों का आरोप है । कि पंचायत सचिव की मनमानी कार्य के कारण पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है । कि आखिर पंचायत सचिव केशव राना को किसका संरक्षण प्राप्त है । जिसके चलते उनके विरुद्ध अब तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है । हालांकि, इन आरोपों के संबंध में पंचायत सचिव का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा ।

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