समाजसेवी अनागरिक कर्मवीर शाक्य का 83 वां जन्मदिन मनाया गया

भिक्षु डी० आर० देव ने बताया की समाजसेवी अनागरिक कर्मवीर शाक्य का जन्मदिन उनके चाहने वाले जनपद फर्रुखाबाद में कई वर्षों से ग्रामवासी चेतना दिवस के रूप में मनाते चले आ रहे हैं। कर्मवीर के जन्मदिन पर केक काटने की परम्परा को अन्जाम नहीं दिया जाता है। स्मरण रहे कर्मवीर के तमाम राजनीतिक व सामाजिक न्याय के योद्धा दुनिया में नहीं रहे है।

कर्मवीर बचपन से वर्णव्यवस्था असमानता के खिलाफ विद्रोही रहे व विद्यार्थी जीवन से ही संघर्षशील रहे।
17 नवम्बर 1966 में डा० लोहिया ने उस समय की सत्ता के खिलाफ पार्लियामेन्ट घेरो का आवाहन किया था।
16 नवम्बर 1966 को डा० लोहिया, राजनरायन सिंह, अर्जुन सिंह भदौरिया, कर्पूरी ठाकुर,बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाह, शरद यादव, किशन पटनायक, जनेश्वर मिश्रा, मनीराम बागणी, सत्यदेव त्रिपाठी,रामआश्रेय वर्मा आदि सामाजिक न्याय के योद्धाओं को एक दिन पहले तिहाड़ जेल में बन्द कर दिया गया था। कर्मवीर अपने दर्जनों साथियों सहित कर्फू तोड़ते हुए तिहाड़ जेल के सीकचों में बन्द कर दिया गया। एक महीना जेल के बाद सन 1990 तक दर्जनों बार भारत के कई जेलों में बन्द रहे। इमरजेन्सी में मीशा बन्दी रहा हूँ। भाजपा नेता सरनाम सिंह गंगवार अभी जिन्दा है। उनकी उम्र 99 वर्ष की होगी। परन्तु कर्मवीर ने लोकतन्त्र सेनानी की पेंशन नहीं ली। उनके तमाम साथी विधायक, एम० पी०, केन्द्रीय मंत्री तक रहे।

मेरठ के सत्यपाल मलिक राजपाल भी रहे वो इस दुनिया में नहीं है।1963 से 1966 तक मुलायम सिंह यादव चर्चित समाजवेदी नहीं थे। तिहाड़ जेल में बन्द मार्क्सवादी नेता नागभूषण पटनायक जिन्हें फांसी की सजा भुगत रहे थे। उन्होने कहाँ माफी नहीं फांसी चाहिए। मैं भगत सिंह के विचारधारा से प्रभावित होकर कम्यूनिस्ट बन गया लाल झंडे से विधायकी का चुनाव कायमगंज विधानसभा से लड़ा और हार गया। बचपन से ही बुध्द, अम्बेडकर, फुले, पेरियार के सामाजिक न्याय के दर्शन से प्रभावित रहा हूं। फर्रुखाबाद में मेरे जेल के साथी लड़ैतेलाले उत्तम भी मेरे साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं।
अब राजनीति वैश्या बन गई है। मौजूदा सरकार पाखंड, अंधविश्वास, असमानता पर आधारित मनुवादी व्यवस्था को कायम करना चाहती है और भारतीय संविधान जो समानता भाईचारा को उपदेश देता है उसको अन्दर अन्दर खोखला करके उसे नष्ट करना चाहती है।

हर वर्ष ग्राम चिलसरी में चेतना दिवस के रूप में कर्मवीर का जन्मदिन मनाया जाता है। चेतना दिवस की अध्यक्षता लड़ैतेलाल उत्तम ने की मुख्य अतिथि के रूप में सुशील विधायक को आना था। उनकी अनुपस्थिति में कर्मवीर के क्लासफेलो डा० रामकिशन राजपूत को मुख्य अतिथि बनाया गया। संचालन ग्रीस बाबू गौतम ने सफलता पूर्वक सम्पन्न किया। बुध्द बन्दना के बाद लड़ैतेलाल उत्तम, इंजी० देवेन्द्र कुमार शाक्य, सरिता नर्सरी के सुखराम सिंह शाक्य, हरीराम शाक्य (पूर्व प्रबंधक ग्रामीण बैंक), ने चेतना दिवस को सम्बोधित किया। कामरेड लड़ैतेलाल उत्तम ने कर्मवीर के जीवन संहर्ष पर बोलते हुए कहा इन्हीं के कारण सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में हमने काम किया और उनके साथ कई बार जेल भी गया। उनके विचारों से मैं प्रभावित होकर अपनी अन्तिम साँस तक सामाजिक न्याय के कारवाँ को आगे बढ़ाते रहेंगे।

इजी०देवेन्द्र कुमार शाक्य ने कहा मैं चाचा कर्मवीर के विचारों से प्रभावित होकर बौद्ध धम्म के संस्कारों से प्रभावित हूँ और उनका बुद्ध विहार को बनाने में काफी योगदान है मैने भी उनकी प्रेरणा से चिल्सरी बुध्दविहार, संकिसा धम्मालोको बुध्द बिहार को लाखों रू० दान में दिया। उपस्थित सभी लोगों से अपील है कि मेरे चाचा ने जो रास्ता दिया उसे आगे बढ़ाए।

डा०रामकिसन राजपूत ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि कर्मवीर ने ही मुझे और मेरी पत्नी उर्मिला को कम्यूनिस्ट पार्टी का मेम्बर बनाया राजपूत ने कहा मेरी पत्नी भाजपा से दो बार विधायक रही उस विचारधारा से मेरा मेल नहीं खाता अब वो समाजवादी पार्टी में हैं। कर्मवीर को इंजीनियर देवेन्द्र कुमार, जयन्त (पुत्र सुखराम शाक्य) व सन्दीप (पुत्र सुशील शाक्य विधायक)ने शाल भेंट कर भिक्षुओं को मुद्रा दान दिया।

इस दौरान सुखराम सिंह, संतोष बौद्ध, हरवेन्द्र सिंह उर्फ लहुरे प्रधान, शिवम, सुनील शाक्य, राहुल शाक्य एडवोकेट, विजयपाल सिंह, वीरबल शाक्य, राजकुमार बौद्ध, पुरुषोत्तम सिंह, फूल सिंह, फूल मियां, महिमाचन्द्र, महेश चन्द्र, मोहन सिंह राजपूत, गीता बौद्ध शांती बौद्ध, फेरू सिंह यादव, डा० दुर्वेश शाक्य, सतीश बौद्ध बी०डी०सी०, डा० अतुल सिंह गंगवार, रनवीर सिंह (सराय अगस्त) ,रणजीत सिंह उर्फ ( टिन्कू) काफी संख्या में लोग मौजूद थे। यहां उपस्थिति सैंकड़ो लोगों को मिष्ठान वित्रण व चाय पिलाई गई।