वाराणसी में चार वंदे भारत ट्रेनों के उद्घाटन पर 3.38 करोड़ रुपये खर्च, छह साल में 6.5 गुना बढ़ा बजट

वाराणसी:(द दस्तक 24 न्यूज़) 07 दिसंबर 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में 8 नवंबर 2025 को चार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का उद्घाटन किया। इस एक दिवसीय कार्यक्रम पर पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल ने कुल 3 करोड़ 37 लाख 93 हजार 351 रुपये खर्च किए। यह जानकारी आरटीआई एक्टिविस्ट अजय बसुदेव बोस द्वारा दायर सूचना अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब में रेलवे प्रशासन ने दी है। विभाग के अनुसार, यह पूरी राशि केवल ‘उद्घाटन कार्यक्रम’ पर खर्च की गई।

छह साल में खर्च 6.5 गुना बढ़ा

इससे पहले 15 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने पहली वंदे भारत एक्सप्रेस (दिल्ली–वाराणसी) को हरी झंडी दिखाई थी। उस समय उद्घाटन कार्यक्रम पर लगभग 52 लाख रुपये खर्च हुए थे। छह साल बाद, 2025 में चार वंदे भारत ट्रेनों के उद्घाटन पर 3.38 करोड़ रुपये खर्च होना बताता है कि कुल बजट में करीब 6.5 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

अगर प्रति ट्रेन खर्च की बात करें, तो 2025 में 84.5 लाख रुपये प्रति ट्रेन का खर्च बैठता है, जो 2019 के मुकाबले लगभग 1.6 गुना अधिक है।

खर्च का विस्तृत ब्योरा नहीं

आरटीआई के जवाब में रेलवे ने केवल कुल खर्च की राशि बताई है, लेकिन खर्च का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया गया। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि—साज-सज्जा का ठेका किस कंपनी को मिला, सुरक्षा व्यवस्था पर कितना खर्च हुआ, मीडिया प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, मंच, प्रचार सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं पर कितना पैसा लगा।

इवेंट मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा खर्च की आशंका

हालांकि, पूर्व के उदाहरणों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे कार्यक्रमों में सबसे बड़ा हिस्सा इवेंट मैनेजमेंट पर खर्च होता है। 8 अप्रैल 2023 को प्रधानमंत्री द्वारा चेन्नई–कोयंबटूर वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन पर 1.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उस मामले में सदर्न रेलवे, चेन्नई डिविजन द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 1.05 करोड़ रुपये (करीब 92%) एक निजी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी इवोक मीडिया को दिए गए थे।

यदि वाराणसी के कार्यक्रम में भी खर्च का पैटर्न यही रहा, तो अनुमान लगाया जा रहा है कि 3 करोड़ रुपये से अधिक राशि केवल इवेंट मैनेजमेंट पर खर्च हुई होगी।

पारदर्शिता पर सवाल

भले ही वंदे भारत ट्रेनें आधुनिक रेल सेवा का प्रतीक बन चुकी हों, लेकिन उद्घाटन कार्यक्रमों पर बढ़ते खर्च और उसका स्पष्ट लेखा-जोखा सार्वजनिक न किया जाना पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में विस्तृत विवरण और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि जनता जान सके कि टैक्स का पैसा किस मद में और कैसे खर्च हो रहा है।