पर्यावरण प्रदूषण के नुकसान झेल रहे प्रदूषण करने वाले भी : डॉ. राम सिंह

हर साल 26 नवम्बर को विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाया जाता है। हमारे चारों ओर फैली सभी चीजें ही हमारा पर्यावरण हैं। पर्यावरण दो प्रकार का होता है: प्राकृतिक और मानवीय। आज हमारे प्राकृतिक पर्यावरण के सभी अंग: जल, वायु और मृदा बहुत प्रदूषित हो चुके हैं और इसका कारण मानवीय पर्यावरण का प्रदूषित होना है। व्यक्ति में नैतिकता की बहुत कमी हो गई है और वह सुविधा भोगी भी हो गया है। वह व्यक्तिगत लाभ के लिए पर्यावरण को हानि पहुंचा रहा है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण हम विभिन्न प्रकार के नुकसान झेल रहे हैं। इसका अर्थ है कि हमारे पर्यावरण को हमने ही प्रदूषित किया है, जिससे हमें ही नुकसान हो रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण के विविध कारण हैं। वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और रासायनिक उत्सर्जन; कोयला, लकड़ी, गोबर के उपले और फसल अवशेष जलाना; निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल; थर्मल पावर प्लांट और रिफाइनरी से उत्सर्जन; आदि वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। जल प्रदूषण के प्रमुख कारण फैक्टरियों के अपशिष्ट और घरेलू सीवेज का शोधन किए बिना जल स्रोतों में डालना, कीटनाशक और रासायनिक उर्वरकों का खेतों से बहकर जल स्रोतों में पहुँचना, जल स्रोतों में प्रतिमा विसर्जन और फूल-प्रसाद डालना, प्लास्टिक और गंदगी का नदियों में फेंकना, खनन और तेल रिसाव, आदि हैं। अत्यधिक रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग, प्लास्टिक और पॉलीथिन का जमाव, औद्योगिक ठोस कचरा, नाभिकीय कचरा, शहरी ठोस कचरा, अम्लीय वर्षा, आदि मृदा प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारण वाहनों के हॉर्न, साइलेंसर, औद्योगिक मशीनरी, लाउडस्पीकर, डीजे, धार्मिक आयोजन, हवाई अड्डों के पास विमानों का शोर, निर्माण कार्य, आदि हैं। तापीय प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण, प्लास्टिक प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, आदि अन्य प्रदूषण हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के मानव और अन्य जीवों पर घातक प्रभाव पड़ते हैं। वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा, COPD, फेफड़ों का कैंसर, हृदयाघात, स्ट्रोक, बच्चों में IQ कम होना, पेड़-पौधों की पत्तियाँ जलना, फसल उत्पादन 10-20 प्रतिशत कम होना, अम्लीय वर्षा, आदि प्रमुख नुकसान हैं। जल प्रदूषण के कारण हैजा, टाइफाइड, डायरिया, आर्सेनिक-फ्लोराइड से कैंसर, किडनी खराब होना, मछलियाँ और अन्य पानी के जीव मरना, यूट्रोफिकेशन, गंगा-यमुना में ऑक्सीजन शून्य होना, आदि घातक प्रभाव पड़ते हैं। भारी धातुओं से कैंसर, भोजन में जहर पहुँचना, मिट्टी बंजर होना, सूक्ष्म जीव मरना, फसल की गुणवत्ता घटना, आदि मृदा प्रदूषण के प्रमुख हानिकारक प्रभाव हैं। ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता कम होना, तनाव, उच्च रक्तचाप, नींद न आना, जंगली जानवरों का आवास छोड़ना, पक्षियों का प्रजनन प्रभावित होना, आदि प्रभाव पड़ते हैं। भोजन में माइक्रोप्लास्टिक, हार्मोन असंतुलन, कैंसर का खतरा, समुद्री जीवों की मृत्यु, खाद्य श्रृंखला में प्लास्टिक का प्रवेश, आदि प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव हैं। इसी तरह, प्रकाश प्रदूषण, तापीय प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण, आदि के भी घातक प्रभाव पड़ते हैं।

पहले के समय में संचारी रोग अधिक होते थे। आज संचारी रोगों के नियंत्रण में काफी हद तक सफलता मिल गई है किन्तु असंचारी रोगों में बहुत वृद्धि हो गई है। पर्यावरण प्रदूषण से संचारी रोगों में पुनः वृद्धि सम्भव है। पर्यावरण प्रदूषण से गांव और शहर दोनों के लोग बहुत प्रभावित हैं क्योंकि अलग-अलग प्रकार का प्रदूषण है किन्तु हर जगह फैला है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण स्वस्थ जीवनशैली जीने वाला व्यक्ति भी बीमार हो रहा है। उदाहरण के लिए, सिगरेट न पीने वाले व्यक्ति के फेफड़े भी वायु प्रदूषण के कारण खराब हो रहे हैं। अनाज हर कोई खाता है। खेतों और फसलों में रासायनिक खादें और कीटनाशक डालने के कारण अनाजों के द्वारा रसायन लोगों के शरीर में पहुंच रहे हैं। इससे कैंसर जैसी भयानक और अन्य बीमारियां हो रही हैं।

हम सभी अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए पर्यावरण प्रदूषण करते हैं। आखिर में हर किसी के द्वारा पर्यावरण प्रदूषण करने के कारण हम सभी का नुक़सान होता है। अंततः, व्यक्तिगत लाभ भी हानि द्वारा संतुलित होकर खत्म हो जाता है या फिर हानि हो जाती है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले अपशिष्ट को शोधित न करने वाले उद्योगपति भी जल और मृदा प्रदूषण से प्रभावित होते हैं, और सार्वजनिक के बजाय व्यक्तिगत वाहनों का प्रयोग करने वाला अमीर और मध्यम वर्ग भी वायु प्रदूषण से नुकसान झेलता है। रसायनयुक्त अनाज, फल और सब्जियों से किसानों सहित हर वर्ग प्रभावित होता है।

पर्यावरण प्रदूषण से हो रही घातक बीमारियों और अन्य हानियों से बचने के लिए हम सभी को प्रयास करने होंगे क्योंकि प्रदूषण फैलाया भी सभी ने मिलकर है। भ्रष्टाचार एक सबसे बड़ा प्रदूषण है। इसके कारण सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का सही से पालन‌ नहीं हो पाता है। अतः आवश्यकता है कि आम जनता और मध्यम वर्ग भी राजनीति करे, ताकि सरकार के नियमों को कठोरता से लागू करवा सके। उद्योगपतियों, व्यवसायियों, अमीर वर्ग, किसानों, आदि सभी को ध्यान रखना चाहिए कि उनके द्वारा किए जा रहे प्रदूषण से उन सभी को भी हानि हो रही है। अतः सभी को पर्यावरण प्रदूषण के रोकथाम हेतु नैतिकतापूर्वक अंत:करण से और अपने बचाव के लिए ही कार्य करना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण के कुछ प्रमुख उपाय हैं: वृक्षारोपण, रासायनिक खादों और कीटनाशकों का कम से कम और सही ढंग से उपयोग करना और धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर बढ़ना, सार्वजनिक वाहनों का अधिकतम प्रयोग करना, ठोस अपशिष्ट का कम से कम निष्कासन, फैक्ट्रियों से अपशिष्ट को शोधित करके ही बाहर निकालना, सौर और बायोमास (गोबर गैस) ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना; कोयला, लकड़ी, कंडे/उपलों का खाना बनाने और आग जलाने के लिए उपयोग न करना, मूर्तियों का विसर्जन और फूल जैसी पूजा सामग्री जल स्रोतों में न डालना, प्लास्टिक से बनी सामग्री का उपयोग न करना, मकानों में वर्षा जल संरक्षण संरचना बनाना, सीएनजी वाहनों का प्रयोग करना, कृषि अवशिष्ट न जलाना, निर्माण स्थलों को ढंकना; लाउडस्पीकर, डीजे, पटाखे, आदि का उपयोग न करना, नवीकरणीय और जैव नाशी संसाधनों से बने सामानों का प्रयोग करना, बिजली-पानी की बचत करना, आदि।

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस पर सभी को पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रयास करने का संकल्प लेना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण में सफलता जन जागरुकता द्वारा ही सम्भव है, क्योंकि आम जनमानस का एक बड़ा हिस्सा अनजाने में ही पर्यावरण का नुक़सान करता है। हम सभी को पर्यावरण द्वारा होने वाली घातक हानियों और पर्यावरण संरक्षण के उपायों का प्रचार-प्रसार करना चाहिए। इससे सभी लोग जागरूक होंगे और धीरे-धीरे पर्यावरण में सुधार होगा।