फर्रुखाबाद:गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार हेतु प्रस्ताव आमंत्रित।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 24 सितम्बर 2025 उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार योजना के अंतर्गत योग्य व्यक्तियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इस संबंध में शासन का पत्र संख्या 203 चालीस-2025-18-1-2025 राष्ट्रीय एकीकरण अनुभाग, लखनऊ, दिनांक 17 सितम्बर 2025 प्राप्त हुआ है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि 30 सितम्बर 2025 तक प्रत्येक दशा में पात्र अभ्यर्थियों के प्रस्ताव प्रेषित किए जाएँ।

पुरस्कार की मुख्य शर्तें

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयनित व्यक्ति को निम्नलिखित मानदंड पूरे करने आवश्यक हैं—

1. वह भारत का मूल नागरिक हो। 2. उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा के भीतर उस वर्ष सामान्यतया निवास करता रहा हो, जिस वर्ष पुरस्कार पर विचार किया जा रहा है। 3. मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान रहा हो। 4. राज्य सरकार द्वारा इस पुरस्कार से पूर्व में सम्मानित न किया गया हो।

पुरस्कार का महत्व

गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार का उद्देश्य उन व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना है, जिन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को सशक्त करने के लिए उल्लेखनीय और समर्पित कार्य किए हैं। इस पुरस्कार के अंतर्गत चयनित व्यक्ति को रु. 1 लाख का नगद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष 6 जनवरी (गुरू गोविन्द सिंह जी का जन्मदिवस) पर राज्य सरकार द्वारा आयोजित समारोह में प्रदान किया जाता है।

प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया

जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा सूचित किया गया है कि पात्र व्यक्तियों के प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का तथ्यात्मक विवरण, अभिलेखीय साक्ष्य और स्पष्ट आख्या/संस्तुति सहित चार प्रतियों में भेजना अनिवार्य है। प्राप्त प्रस्तावों को समयबद्ध ढंग से अपर जिलाधिकारी फर्रुखाबाद की सेवा में प्रेषित किया जाएगा।

यदि किसी संस्था अथवा व्यक्ति के पास उपयुक्त प्रस्ताव उपलब्ध नहीं है, तो उसकी सूचना शून्य के रूप में भी कार्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है। यह पुरस्कार न केवल समाज में मानवाधिकार और एकता के मूल्यों को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि उन व्यक्तियों को सम्मान देने का भी माध्यम है, जिन्होंने अपने जीवन को सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए समर्पित कर दिया है।