मैनपुरी: संकिसा में पालि एवं प्राकृत साहित्य पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

महाबोधि महाविद्यालय, मैनपुरी और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘पालि एवं प्राकृत साहित्य में निहित मानवीय एवं आर्थिक मूल्यों की प्रासंगिकता’’ विषय पर महाबोधि ग्रुप आफ एजूकेशन के प्रबन्धक श्री गिरन्द सिंह शाक्य के संरक्षण एवं महाबोधि महाविद्यालय, कुसमरा के प्राचार्य डा. नेत्रपाल सिंह (भिक्षु धम्मपाल थेरो) के समन्वयन में 29 अगस्त 2025 को एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन राजघाट संकिसा स्थित शाक्यमुनि बुद्ध विहार में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री गिरन्द सिंह शाक्य ने मानवीय एवं आर्थिक मूल्यों की स्थापना में पालि एवं प्राकृत की भूमिका पर बल दिया। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के डॉ ज्ञानादित्य शाक्य ने अपने बीज वक्तव्य में संगोष्ठी की विषयवस्तु की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए मानव जीवन में अप्रमाद के महत्व पर अपने विचार रखे। डा. धम्मदीप वान्खेडे (दिल्ली) ने पालि साहित्य में वर्णित विपस्सना के उपादेयता पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने प्राकृत साहित्य की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला। डा. उपनन्द थेरो (लखनऊ) ने पालि साहित्य में वर्णित मानवीय मूल्यों की उपादेयता पर अपने विचार रखे। भन्ते ज्ञानालोक ने (लखनऊ) बौद्ध धर्म दर्शन के महत्व पर अपने विचार रखे। समन्वयक डा. भिक्षु धम्मपाल थेरो ने संगोष्ठी की विषयवस्तु एवं उद्देश्य की चर्चा करते हुए कहा कि इस एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन का मूल उद्देश्य शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं आम जनमानस को पालि एवं प्राकृत साहित्य में वर्णित मानवीय एवं आर्थिक मूल्यों से अवगत कराना है। उन्होंने वित्तीय सहयोग हेतु उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के निदेशक श्री विनय श्रीवास्तव के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डा. भिक्षु धम्मपाल थेरो ने स्वागत भाषण दिया तथा सम्मानित विद्वानों एवं अतिथियों को सम्मानित भी किया।