फर्रुखाबाद-जलालाबाद-शाहजहांपुर-मैलानी रेलवे लाइन पर संसद में उठा सवाल, रेल मंत्रालय ने स्वीकृति से किया इंकार।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 25 अगस्त 2025 फर्रुखाबाद से जलालाबाद, शाहजहांपुर होते हुए मैलानी तक प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर लंबे समय से क्षेत्र की जनता उम्मीद लगाए बैठी है। इस संबंध में विभिन्न अखबारों और जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर स्वीकृति की बात कही जाती रही, लेकिन आज संसद में इस विषय पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई।

संसद में उठे सवाल

20 अगस्त 2025 को लोकसभा में फर्रुखाबाद के सांसद श्री नीरज मौर्य ने मा. रेल मंत्री से यह प्रश्न किया कि —

क्या सरकार फर्रुखाबाद को जलालाबाद, शाहजहांपुर होते हुए मैलानी से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन बनाने की योजना रखती है?

यदि हाँ, तो परियोजना की स्थिति, समयसीमा और बजट क्या है?

यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं और क्या सरकार कोई वैकल्पिक परिवहन सुधार योजना ला रही है?

रेल मंत्री का जवाब

रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए कहा —

फर्रुखाबाद और मैलानी पहले से ही कासगंज और बरेली के रास्ते मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

संपर्कता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जलालाबाद और शाहजहांपुर मार्ग से 158 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन का सर्वेक्षण किया गया था।

लेकिन कम यातायात अनुमानों के कारण परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

इस प्रकार, मंत्रालय ने यह साफ कर दिया कि फिलहाल इस नई रेल लाइन को स्वीकृति नहीं दी गई है।

जनता में बनी हुई थी भ्रम की स्थिति

पिछले कुछ समय से क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर थी कि यह रेल लाइन स्वीकृत हो चुकी है। कई अखबारों और राजनीतिक मंचों पर भी इस बारे में सकारात्मक दावे किए जाते रहे। लेकिन संसद में आए इस जवाब ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया कि यह परियोजना अभी मंजूरी के स्तर तक नहीं पहुंची है।

संघर्ष जारी रहेगा

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों का मानना है कि यह रेल लाइन न सिर्फ फर्रुखाबाद, बल्कि शाहजहांपुर और खीरी जनपद के लिए भी विकास की नई राह खोल सकती थी। इसलिए वे इसके लिए संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं।

निष्कर्ष

फिलहाल रेल मंत्रालय के जवाब ने यह साफ कर दिया है कि फर्रुखाबाद-जलालाबाद-शाहजहांपुर-मैलानी रेलवे लाइन की स्वीकृति नहीं हुई है। जनता को अब तक जिस आशा में रखा गया था, वह अधूरी साबित हुई है। अब सवाल यह है कि क्षेत्रीय विकास और परिवहन सुविधा बढ़ाने के लिए आगे सरकार कौन-से कदम उठाती है।