ट्रंप दिखाते रहे आंख इधर भारत ने रूस के साथ कर डालीं कई बड़ी डील

भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित तरीके से बढ़ाने और ऊर्जा सहयोग को बनाए रखने का गुरुवार (21 अगस्त 2025) को संकल्प लिया और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गैर-शुल्क (टैरिफ) बाधाओं और नियामक अड़चनों को तेजी से दूर करने की आवश्यकता को रेखांकित किया. दोनों देशों की तरफ से रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने सहित द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने का यह संकल्प, व्यापार और टैरिफ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती दूरी के बीच लिया गया है.

जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ व्यापक वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि भारत और रूस के बीच संबंध द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया के सबसे प्रमुख संबंधों में से एक रहे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक स्थिति, जन भावनाएं और नेतृत्व संपर्क इसके प्रमुख प्रेरक बने रहेंगे.’’ जयशंकर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नवंबर या दिसंबर में होने वाली भारत यात्रा के अलग-अलग पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार (19 अगस्त) को मॉस्को पहुंचे. लावरोव के साथ बातचीत में जयशंकर ने कहा, ‘‘आज हमारी बैठक के लिए वैश्विक संदर्भ उभरती भू-राजनीतिक स्थिति, बदलते आर्थिक और व्यापार परिदृश्य है और हमारा साझा लक्ष्य हमारी पूरकता को अधिकतम करना है.’’ जयशंकर और लावरोव ने आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया. जयशंकर ने कहा, ‘‘आतंक के मुद्दे पर, हमने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ने का संकल्प लिया.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने के भारत के दृढ़ संकल्प और सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करने के हमारे संप्रभु अधिकार से अवगत कराया.’’ जयशंकर की टिप्पणियों से ऐसा प्रतीत हुआ कि उनकी बातचीत का मुख्य केंद्र द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है.


विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हमने रूस को भारत के निर्यात को बढ़ाने समेत, संतुलित और टिकाऊ तरीके से द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने की अपनी साझा महत्वाकांक्षा की पुष्टि की.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए गैर-शुल्क बाधाओं और नियामक बाधाओं को तुरंत दूर करने की आवश्यकता है. फार्मास्यूटिकल, कृषि और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने से निश्चित रूप से मौजूदा असंतुलन को दूर करने में मदद मिलेगी.’’जयशंकर ने कहा, ‘‘उर्वरकों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए गए. भारतीय कुशल श्रमिक, विशेष रूप से आईटी, निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में रूस की श्रम आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं और सहयोग को प्रगाढ़ कर सकते हैं.’’ उन्होंने कहा कि व्यापार और निवेश के माध्यम से ऊर्जा सहयोग को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.

रूसी सेना में सेवा दे रहे भारतीयों का मुद्दा
विदेश मंत्री ने रूसी सेना में सेवा दे रहे कुछ भारतीयों का मुद्दा भी उठाया.उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, कई लोगों को रिहा कर दिया गया है, फिर भी कुछ मामले लंबित हैं और कुछ लोग लापता हैं. हमें उम्मीद है कि रूसी पक्ष इन मामलों को शीघ्रता से सुलझाएगा.’’बैठक में जयशंकर और लावरोव ने वैश्विक शासन में सुधार के लिए भारत और रूस की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की. दोनों पक्षों ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफग़ानिस्तान में स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया. जयशंकर ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि भारत का दृष्टिकोण मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को आवश्यक मानता है.’’

भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों का उल्लेख
लावरोव के साथ बैठक में विदेश मंत्री ने वर्ष के अंत में होने वाले वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ‘‘आज मैं चाहता हूं कि इन द्विपक्षीय चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाए ताकि वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान हमें अधिकतम परिणाम प्राप्त हो सकें.’’ ऐसा माना जा रहा है कि लावरोव के साथ जयशंकर की बातचीत में भारत-रूस ऊर्जा संबंधों पर प्रमुखता से चर्चा हुई.