संसद सत्र में हुए हंगामे से 166 घंटे बर्बाद, जनता के टैक्स के 248 करोड़ डूबे ? इसका जिम्मेदार कौन पक्ष या विपक्ष : आदर्श कुमार

ऑपरेशन सिंदूर से लेकर बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर हुए हंगामे के साथ संसद का मानसून सत्र बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव, अंतिम दो सप्ताह में थोक में निपटाए गए विधायी कामकाज, जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफे और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू करने के कारण चर्चा में रहा।

हंगामे के कारण संसद के 166 घंटे बर्बाद हो गए। इससे जनता के टैक्स के करीब 248 करोड़ रुपये डूब गए। विशेष चर्चा के बाद ऑपरेशन सिंदूर मामले में टकराव टला, मगर एसआईआर को लेकर सियासी संग्राम अंतिम दिन तक जारी रहा। हंगामे के कारण लोकसभा के 84.5 घंटे, जबकि उच्च सदन राज्यसभा के 81.12 घंटे बर्बाद हो गए। राज्यसभा की कार्यवाही 38.88 घंटे ही चल सकी। इन सबके पीछे बर्वादी का जिम्मेदार कौन पक्ष या विपक्ष । गौरतलब है की किसी भी सदन की एक मिनट की कार्यवाही पर 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। यानी एक घंटे का खर्च लगभग 1.5 करोड़ रुपये बैठता है। इससे लोकसभा में कार्यवाही न चलने से 126 करोड़ रुपये और राज्यसभा में करीब 122 करोड़ बर्बाद हुए। हालांकि, अंतिम नौ कार्य दिवसों में ताबड़तोड़ विधायी कामकाज निपटाए गए। राज्यसभा में 15 तो लोकसभा में 12 विधेयक पारित किए गए। सत्र के अंतिम दो सप्ताह में सरकार विधायी कामकाज निपटाने के मामले में हड़बड़ी में दिखी। दोनों सदनों में 27 विधेयक पारित हुए। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के बीच सभी विधेयक या तो बिना किसी चर्चा के या चर्चा की औपचारिकता निभाकर ध्वनिमत से पारित कराए गए। देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर विशेष चर्चा में भी विपक्ष ने हिस्सा नहीं लिया और यह चर्चा अधूरी रही।