नोएडा:(द द दस्तक 24 न्यूज़) 07 अगस्त 2025 नोएडा के सेक्टर 82 के आसपास के इलाकों—सलारपुर, भंगेल और ग़ाज़ीपुर—में अतिक्रमण का मसला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण की आँखों के सामने बेतहाशा अवैध निर्माण और ज़मीन कब्ज़ा किया गया, लेकिन कार्यवाही के नाम पर अब तक सिर्फ कागज़ी औपचारिकताएं होती रहीं।
कुछ दिन पहले नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के आदेश पर इन सभी अतिक्रमित स्थलों पर नोटिस चस्पा किए गए थे, जिसमें स्पष्ट निर्देश था कि अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए। लेकिन स्थिति यह रही कि न तो अतिक्रमण रुका और न ही चेतावनी का असर दिखा—बल्कि स्थानीय लोगों ने नोटिस को फाड़कर गंदे नाले में फेंक दिया। अब नोएडा प्राधिकरण के सीईओ फुल एक्शन मोड में आ चुके हैं। उन्होंने बड़ा कदम उठाते हुए 39 बिल्डर्स और कॉलोनाइज़रों के खिलाफ ‘भूमाफिया एक्ट’ लगाने की सिफारिश की है। इस सिलसिले में जिलाधिकारी को पत्र भेजा जा चुका है।
सवाल उठते हैं अधिकारियों की भूमिका पर
इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो अधिकारी इन क्षेत्रों का निरीक्षण और निगरानी करते हैं, उनकी जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही? क्या स्थानीय वर्क सर्किल के ज़िम्मेदार अधिकारी अतिक्रमण से अनजान थे? या फिर यह सब कुछ मिलीभगत और संरक्षण के तहत हो रहा था? इतना ही नहीं, जब बड़े अधिकारी समय-समय पर फील्ड विज़िट पर आते हैं, तो क्या उन्हें ये अवैध निर्माण नहीं दिखे? यदि दिखा और फिर भी कार्यवाही नहीं की गई, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
जनता का विश्वास और प्रशासन की साख दांव पर
इस पूरे मामले ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता का कहना है कि यदि समय रहते अधिकारियों ने सख्ती बरती होती, तो आज हालात इतने नहीं बिगड़ते। भूमाफिया पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ अब ज़रूरत इस बात की भी है कि जो अधिकारी इस अतिक्रमण के दौरान चुप रहे, उनके खिलाफ भी निष्पक्ष जांच हो और ज़िम्मेदारी तय की जाए। नोएडा में तेज़ी से हो रहे अवैध निर्माण और सरकारी भूमि पर कब्जे की घटनाएं यह बताती हैं कि प्रशासन को अब केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की भी ज़रूरत है—तभी जाकर शहर में क़ानून का राज स्थापित हो पाएगा।
