फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 जुलाई 2025 नय भारत सभा भवन ठंडी सड़क में त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत, विशिष्ट अतिथि भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष फतेहचंद्र वर्मा एवं महामंत्री देवेंद्र सिंह राठौर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने की।
गोष्ठी में उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से अपील की कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि जनपद की मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा अत्यंत कम है, जिसे हरी खाद, गोबर की खाद एवं जैविक विधियों से बढ़ाया जा सकता है।
जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने संरक्षित खेती के लिए पालीहाउस, ग्रीनहाउस, मिनी कोल्ड स्टोरेज और निजी मंडी स्थापना पर 50% अनुदान की जानकारी दी। अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने नंदनी कृषक समृद्धि योजना की विस्तार से जानकारी देते हुए 50% अनुदान का उल्लेख किया।भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष फतेहचंद्र वर्मा ने रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से होने वाले नुकसान की चेतावनी देते हुए किसानों से तकनीकी गोष्ठियों में भाग लेने और मृदा की जांच कराते रहने की अपील की।
जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही हैं। पहली बार जनपद में मक्का एवं मूंगफली की सरकारी खरीद हो रही है। उन्होंने बताया कि 2.5 लाख किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही भरोसा दिलाया कि जनपद में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मृदा की गुणवत्ता गिर रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों को जैविक खाद और हरी खाद अपनाने की सलाह दी और कहा कि वे अपने परिवार के लिए बिना रासायनिक खाद वाले अन्न का उत्पादन कर खुद अनुभव करें। उन्होंने श्री अन्न (रागी, बाजरा, ज्वार) की खेती व उपभोग को बढ़ावा देने की अपील की। कार्यक्रम में किसानों को जैविक कीटनाशी किट, रागी-बाजरा-तिल के मिनीकिट एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। गोष्ठी के अंत में प्रगतिशील किसानों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। यह गोष्ठी जनपद के किसानों को वैज्ञानिक, जैविक और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।
