फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 11 जुलाई 2025 जनपद में आज विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े की शुरुआत की गई। यह पखवाड़ा 11 जुलाई से 18 जुलाई तक चलेगा, जिसमें जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और सिविल अस्पताल लिंजीगंज में परिवार नियोजन जागरूकता और सेवाओं से संबंधित गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी।
मुख्य कार्यक्रम डॉ. राममनोहर लोहिया महिला चिकित्सालय में आयोजित हुआ, जहां परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. दलवीर सिंह ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, “स्वस्थ समाज की नींव एक स्वस्थ मां और बच्चे से होती है। परिवार में बच्चों के बीच उचित अंतर जरूरी है ताकि मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।”
परिवार नियोजन स्टॉल का किया गया निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कटारिया ने परिवार नियोजन से संबंधित स्टॉलों का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध साधनों और सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से कु. दीप्ति यादव ने किया।
बेटा-बेटी में भेद नहीं – जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक
डॉ. आर. सी. माथुर (उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी) ने कहा कि, “बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है। यदि हम सिर्फ बेटे की चाहत में लगातार बच्चे पैदा करते रहेंगे तो जनसंख्या विस्फोट एक दिन बड़ी चुनौती बन जाएगा।”
सेवाएं प्रतिदिन उपलब्ध
सीएमएस डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने जानकारी दी कि डॉ. राममनोहर लोहिया महिला चिकित्सालय में परिवार नियोजन के सभी स्थाई और अस्थाई साधन जैसे – महिला नसबंदी, पुरुष नसबंदी, पीपीआईयूसीडी, आईयूसीडी, अंतरा इंजेक्शन, छाया गोली, और कंडोम प्रतिदिन उपलब्ध हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इन सेवाओं का लाभ लेकर देश के विकास में योगदान दें।
उपस्थित प्रमुख लोग
कार्यक्रम में डॉ. कैलाश, डीपीएम कंचन बाला, डीसीपीएम रणविजय प्रताप सिंह, जिला परिवार नियोजन प्रबंधक विनोद कुमार, आरकेएसके से चंदन यादव, शहरी समन्वयक राजीव पाठक, क्वालिटी एश्योरेंस से डॉ. शेखर यादव, सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता एवं योग्य दंपती उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर आयोजित यह पखवाड़ा जनसंख्या स्थिरता, परिवार नियोजन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाएगा बल्कि जनमानस में जागरूकता का प्रसार भी करेगा।
