नोएडा में ‘श्वान संकट’ बना गंभीर चुनौती: 5 माह में 74,550 काटने के मामले, समाधान की राह अधूरी

नोएडा:(द दस्तक 24 न्यूज़) 23 जून 2025 नोएडा जैसे आधुनिक और योजनाबद्ध शहर में अब एक नया संकट गहराता जा रहा है—श्वान संकट। यह संकट न केवल आमजन की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि प्रशासन की अक्षमता और पशु कल्याण नीति की खामियों को भी उजागर कर रहा है।

पिछले पांच महीनों में नोएडा में 74,550 लोगों को आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह संख्या न केवल चिंताजनक है, बल्कि भयावह भी, क्योंकि यह मामला अब सिर्फ ‘कुत्ते काटने’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक असंतुलन का प्रतीक बन चुका है।

दुश्चक्र की आशंका: हमले और प्रतिक्रिया

शहरवासी भय और गुस्से में हैं। लगातार हो रहे हमलों से परेशान लोग अब आवारा कुत्तों पर आक्रामक रुख अपनाने लगे हैं। इसका सीधा परिणाम यह हो रहा है कि कुत्तों में भी आक्रामकता बढ़ रही है और वे और अधिक हिंसक व्यवहार कर रहे हैं। यदि यह क्रम नहीं रुका, तो यह दुश्चक्र एक विकराल सामाजिक संकट का रूप ले सकता है—जहां न तो इंसान सुरक्षित रहेगा और न ही जानवर।

छुट्टा पशुओं के बाद अब ‘श्वान समस्या’

उत्तर प्रदेश में छुट्टा गौवंश की समस्या पहले ही किसानों और आम लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। अब उसी समस्या की एक नई शाखा के रूप में यह ‘श्वान संकट’ सामने आया है, जो शहरों में सामाजिक जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को चुनौती दे रहा है।

प्रशासन की निष्क्रियता और सवाल

अब सवाल यह है कि क्या इस समस्या के समाधान के लिए भी वही आईएएस अफसर तैनात किए जाएंगे जिन्होंने छुट्टा गौवंश की समस्या पर वर्षों में कोई ठोस कार्य नहीं किया? यदि हां, तो परिणाम पहले से ही स्पष्ट हैं—निरर्थक बैठकों, रिपोर्टों और कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति।

सवाल यह भी उठता है कि नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की क्या कोई संयुक्त कार्ययोजना है? यदि है, तो उसके प्रभाव क्यों नहीं दिख रहे? और यदि नहीं है, तो यह जनस्वास्थ्य और नागरिक सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही नहीं तो और क्या है?

संभावित समाधान:

1. नसबंदी अभियान तेज किया जाए ताकि श्वानों की अनियंत्रित संख्या पर रोक लगे।

2. पुनर्वास नीति और शेल्टर होम की संख्या बढ़ाई जाए, जहां इन कुत्तों को सुरक्षित ढंग से रखा जा सके।

3. प्रशासनिक निगरानी तंत्र बनाकर जवाबदेही तय की जाए।

4. जनजागरूकता अभियान चलाया जाए जिससे आम नागरिक भी संयमित और जिम्मेदार रवैया अपनाएं।

निष्कर्ष:

नोएडा जैसे स्मार्ट सिटी के सपनों को साकार करने के लिए स्मार्ट समस्याओं का स्मार्ट समाधान जरूरी है। श्वान संकट सिर्फ एक नगर निगम का मुद्दा नहीं, यह अब जनस्वास्थ्य, मानवाधिकार, पशु कल्याण और सुशासन से जुड़ा बहुआयामी मुद्दा बन चुका है। अब वक्त आ गया है कि इस पर गंभीरता से विचार हो, वरना आने वाले दिनों में यह संकट नासूर बनकर शहर की सुरक्षा और छवि दोनों को घायल कर सकता है।