फूंक-फूंक कर नहीं चले तो खतरे में तेजस्वी यादव!

पिता लालू प्रसाद यादव से राष्ट्रीय जनता दल की कमान ले चुके हैं तेजस्वी यादव। राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जहां उनके पिता बहुमत वाली सरकार चलाते थे, उसी बिहार में महज दो विधायक घट जाएं तो तेजस्वी यादव के पीछे से विपक्ष के नेता की कुर्सी खिंच जाएगी। लालू केंद्र के लिए ‘किंग मेकर’ कहलाते थे और तेजस्वी पटना की बांकीपुर सीट पर अपने प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बचा पा रहे। उस पर लगातार दुश्मन पाले जा रहे। बाहरी तो बाहरी, घर में भी। इतना होने के बावजूद विपक्ष के नेता की प्राथमिक जिम्मेदारी से बार-बार पीछे हट रहे। लेकिन, अब मामला बॉर्डर पर है। और, बॉर्डर पर सामने हैं नए-नवेले विधायक प्रशांत किशोर। प्रशांत कुर्सी तो नहीं खींचेंगे, लेकिन कद तो एक गलती पर घटा देंगे- यह तय है।

पिछले दिनों जब AISA के आंदोलन के दौरान तेज प्रताप यादव गिरफ्तार हुए तो बातों-बातों में तेजस्वी यादव ने भ्रातृ-प्रेम दिखाने की कोशिश की, लेकिन इससे बड़े भाई पिघले नहीं। तेज प्रताप यादव को लालू परिवार और राष्ट्रीय जनता दल से बाहर भले सीधे-सीधे तेजस्वी ने नहीं किया, लेकिन आरोपी वही हैं इस कार्रवाई के। उसी तरह, बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद जब लालू को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य रोती हुई घर से निकलीं तो भी आरोप के दायरे में तेजस्वी ही थे। तेज प्रताप यादव ने प्रशांत किशोर से दो महीने पहले मुलाकात की। फिर बांकीपुर में प्रत्याशी दिया, लेकिन उस उम्मीदवार के नामांकन रद्द होते ही खुलकर प्रशांत किशोर के समर्थन में आ गए। उम्मीदवार ने तो तुरंत ही समर्थन का एलान कर दिया था। उसके बाद, अब जब प्रशांत किशोर जीतकर विधायक बने तो तेज प्रताप यादव के साथ-साथ रोहिणी आचार्य ने भी उन्हें सामने आकर बधाई दी। मतलब, घर में दुश्मनी घट नहीं रही। बढ़ ही रही है।

तेजस्वी यादव की एक खास बात की चर्चा रोहिणी आचार्य लगातार कर रही थीं कि वह ‘घिरे’ हैं। तेज प्रताप ने तो छोटे भाई को घेरने वालों के नाम संकेत में बता दिए। लेकिन, तेजस्वी नहीं बदले। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों की संख्या 25 रह गई। कांग्रेस और बाकी सहयोगी दलों को किनारे रखकर तेजस्वी यादव ने 143 सीटों पर प्रत्याशी दिए थे। तब 25 पर जीत मिली थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा को तो इंतजार ही कराते रह गए थे। राजद ने बुरे दिनों में भी 2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, बाद में जोड़-घटाव भी खूब हुआ। कुढ़नी सीट उप चुनाव में राजद हार गया और विकासशील इंसान पार्टी के विधायक के निधन से खाली हुई बोचहां सीट उप चुनाव में जीत गया। इस तरह उसके विधायकों की संख्या 75 रहती। लेकिन, तेजस्वी यादव ने तब असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच में से चार विधायकों को अपने साथ मिलाकर राजद विधायकों की संख्या 79 कर ली थी।

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