राहुल गांधी बोले- सरकार की विदेश नीति का मतलब सिर्फ नेताओं को गले लगाना है

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर लोगों को अपनी बात रखने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रही उत्तराखंड की एक महिला का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि सरकार व्यवस्था लागू करना चाहती है, जबकि कांग्रेस का काम भारत को अपनी बात कहने का अवसर देना है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सिर्फ व्यक्तिगत मित्रता या गर्मजोशी दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी देश के हितों की रक्षा करना है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह विचार कहां से आया कि विदेश नीति का मतलब दूसरे देशों के नेताओं को गले लगाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री की भूमिका दोस्ती निभाने की नहीं, बल्कि देश के हितों की सुरक्षा करने की है।

अपनी बात समझाने के लिए राहुल गांधी ने बचपन की अमेरिका यात्रा का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी उम्र करीब 12 साल थी और वह अपनी मां सोनिया गांधी, बहन प्रियंका और दादी इंदिरा गांधी के साथ अमेरिका गए थे। इंदिरा गांधी उस समय प्रधानमंत्री थीं। राहुल गांधी के मुताबिक, एक आधिकारिक रात्रिभोज में इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी गई थीं, जबकि बच्चे घर पर ही रुके थे। कुछ घंटे बाद इंदिरा गांधी वापस लौटीं और उन्होंने सोनिया गांधी से कहा कि अमेरिकी उन्हें मूर्ख समझते हैं।

राहुल गांधी ने बताया कि इंदिरा गांधी ने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि नैन्सी रीगन ने उसी रंग की पोशाक पहनी थी, जिस रंग की उनकी साड़ी थी। राहुल गांधी ने इस प्रसंग का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि कूटनीतिक मुलाकातों को केवल दोस्ताना व्यवहार या दिखावे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री विदेश दौरे पर किसी दोस्त के घर जाने की तरह नहीं जाते। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री की भूमिका व्यक्तिगत मित्रता से आगे है और उनका मुख्य दायित्व देश के हितों की रक्षा करना है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चीन ने भारत को अपनी ही जमीन पर पेट्रोलिंग करने से रोक दिया, लेकिन सरकार ने इस खबर को दबाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इससे देश को नुकसान हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि गलवां घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत की एक इंच जमीन भी किसी के कब्जे में नहीं है। वहीं, राहुल के मुताबिक सेना ने जमीन पर कब्जे की बात कही थी। उन्होंने दावा किया कि जब इस मुद्दे पर भारतीय सेना ने चीन से बातचीत की तो चीनी पक्ष ने प्रधानमंत्री के इसी बयान का हवाला दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का पूरा ध्यान अपने राजनीतिक ढांचे को मजबूत करने और अदाणी से पैसा लेने पर है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने देश को हर स्तर पर नुकसान पहुंचाया है।

राहुल गांधी ने ईरान में युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के लिए यह अपनी ताकत और पुराने संबंधों का इस्तेमाल करने का अवसर था। उन्होंने कहा कि ईरान भारत का पुराना मित्र रहा है, जबकि अमेरिका और रूस से भी भारत के संबंध रहे हैं। राहुल के मुताबिक, भारत इस स्थिति में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका हासिल कर ली।

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