Thursday, 24 September 2026 | 8:46 AM
राजनीति

एसआईआर पर घिरा चुनाव आयोग?: थरूर ने पूछे तीखे सवाल

एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित 14 आपत्तियों पर चुनाव आयोग के बयान के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को कई सवाल उठाए हैं।
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एसआईआर पर घिरा चुनाव आयोग?: थरूर ने पूछे तीखे सवाल
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एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित 14 आपत्तियों पर चुनाव आयोग के बयान के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डाटाबेस के केंद्रीकरण, गोवा के 97 मतदाताओं, बहाल किए गए नामों के खिलाफ अपील और कैबिनेट सचिव से कथित संवाद समेत सभी मुद्दों पर बिंदुवार और दस्तावेजी स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने आगे कहा कि आयोग का जवाब उन कई खास सवालों का जवाब देता हुआ नहीं दिखता, जो इस पूरे मामले में उठे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी संस्थाओं का महत्व देखते हुए इन सवालों को सार्वजनिक रिकॉर्ड पर रखना और उनका पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना जरूरी है। वहीं ईसी ने कहा है कि अलग-अलग राय और सुझाव किसी भी संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और उसके सभी अंतिम आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। 

थरूर की यह प्रतिक्रिया ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि कुछ फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देशभर में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी चुनाव आयोग की निगरानी में चल रही थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी मतदाता सूची के डाटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं। 

दो चुनाव आयुक्तों की ओर से एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के बाद चुनाव आयोग पर भी जवाब देने का दबाव बढ़ा। आयोग ने बुधवार को कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय या टिप्पणियां आना सामान्य बात है। आयोग ने अपने बयान में कहा कि उसके सभी आदेश पूरी कानूनी मान्यता रखते हैं और तय वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किए जाते हैं। आयोग के मुताबिक, अंतिम फैसला लिए जाने से पहले अलग-अलग विचार और सुझाव निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।