मैनपुरी में जल निगम की जांच में होती रही है फ्लोराइड की अधिकता की पुष्टि

मैनपुरी में ये पहली बार नहीं है जब मैनपुरी के पानी में फ्लोराइड की अधिकता की बात सामने आई है। इससे पूर्व जल निगम द्वारा की जाने वाली नियमित पानी की जांच में भी इसकी पुष्टि हो सकी है। लेकिन इसके निदान के लिए आज तक कोई इंतजाम नहीं किए जा सके।

जल निगम द्वारा प्रत्येक वर्ष सरकारी हैंडपंप और सरकारी नलकूप के पानी के नमूने लेकर उनकी जांच की जाती है। इसी जांच में ये पुष्टि हुई थी मैनपुरी के बड़े क्षेत्र में भूगर्भ जल में फ्लोराइड की अधिकता है। इसी के बाद जल निगम ने जिले भर में लगे 50 हजार के करीब हैंडपंपों में से 6 हजार हैंडपंपों को लाल रंग से पुतवा दिया था। येे वे हैंडपंप थे जिनसे लिए गए पानी के नमूने में फ्लोराइड की अधिकता पाई गई थी।

वहीं दूसरी तरफ थाना दन्नाहार क्षेत्र के गांव कीरतपुर में एक बड़ी समस्या सामने आई थी। तीन साल पहले हुई पानी की जांच में यहां क सभी हैंडपंप और सरकारी नलकूप की बोरिंग के पानी के नमूनों में फ्लोराइड के पानी की अधिकता मिली थी।

इसके बाद ये पानी न पीने के लिए लोगों को जागरूक किया गया था। वहीं गांव में बनी पानी की टंकी के लिए दोबारा बोरिंग की गई थी। लेकिन दोबारा की गई बोरिंग में भी फ्लोराइड की अधिकता मिली थी। जांच के बाद जल निगम की टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि पूरे गांव के ही भूगर्भ जल में फ्लोराइड की अधिकता है। इस पर जल निगम ने वृहद आरओ प्लांट लगाने या किसी दूसरे गांव में बोरिंग कर पाइपलाइन डालने की सलाह दी थी।
लेकिन दोनों ही प्रोजेक्ट की कीमत इतनी अधिक थी कि उन्हें धरातल पर नहीं उतारा जा सका। नतीजा आज भी लोग वही फ्लोराइड का पानी पी रहे हैं।

दांतों और पाचन तंत्र को करता है कमजोर
पानी मे फ्लोराइड की अधिकता मानव शरीर के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। जिला अस्पताल के डेंटल सर्जन डॉ. आर सिंह बताते हैं कि फ्लोराइड की अधिकता वाला पानी दांतों के कवच को पहले क्षतिग्रस्त कर देता है। इसके साथ ही पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है। धीरे-धीरे समय के साथ शरीर पर इसके अन्य दुष्प्रभाव भी नजर आते हैं।