प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के आरमबाग में चुनावी रैली को संबोधित किया है। इससे पहले उन्होंने बनगांव में जनसभा को संबोधित किया था। वहीं आरमबाग की रैली में भी पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा, कुछ समय पहले मैं सिंगूर आया था, उसी समय मैंने टीएमसी की निर्मम सरकार के प्रति जनता का गुस्सा साफ-साफ देख रहा था। आज मैं फिर देख रहा हूं, वो गुस्सा अपने चरम पर पहुंच चुका है, और इस गुस्से में बंगाल का एक ही उद्देश्य है। 15 साल तक टीएमसी ने बंगाल के लोगों को लूटा, लेकिन ये लोग एक चीज भूल गए, जब अत्याचार की हद हो जाती है, तो जनता मां दुर्गा का रूप धर कर अन्याय का विसर्जन कर देती है। आज बंगाल के हर बूथ पर उमड़ता जनसैलाब कह रहा है, भय OUT-भरोसा IN।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि टीएमसी की निर्मम सरकार, नबन्ना सचिवालय से नहीं चलती है। इस सरकार को या तो गुंडे और मस्तान चलाते हैं या फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार हरकत में आती है। मैंने कहा था कि बंगाल में मतदान के सभी पिछले रिकॉर्ड टूट जाएंगे, और बंगाल की जनता ने 23 अप्रैल को इसे सच कर दिखाया। अब आपको 23 अप्रैल को बने रिकॉर्ड को तोड़ना होगा।जनता के मिजाज का अंदाजा न लगा पाने वाले लोग भारी संख्या में मतदाताओं के आने से हैरान हैं। टीएमसी नेता चिंतित हैं क्योंकि उन्होंने इतनी भारी संख्या में मतदान की उम्मीद नहीं की थी।
टीएमसी पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि निर्मम सरकार ने यहां अपने कुकर्मों से बंगाल की जनता का भरोसा खो दिया है, इसलिए लोग आए दिन कोर्ट-कचहरी जाने को मजबूर हैं। शिक्षक भर्ती घोटाला, टीएमसी के मंत्रियों ने भर्ती लूट ली, हजारों युवाओं को बर्बाद कर दिया। संवेदनशील सरकार होती तो ईमानदारी से जांच करती, लेकिन कोर्ट को इस मामले में जांच के आदेश देने पड़े। यानी टीएमसी सरकार की विश्वसनीयता शून्य है। 2023 के पंचायत चुनावों के दौरान, जिनका संचालन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हीं के हाथों में होती है, न्यायालय इस बात से आश्वस्त हुआ कि टीएमसी सरकार सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं है, और इसलिए न्यायालय ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया। इसका अर्थ है कि टीएमसी की विश्वसनीयता शून्य है। एक अन्य उदाहरण संदेशखाली मामले की जांच है। इसमें भी न्यायालय ने टीएमसी सरकार पर सवाल उठाए।
