फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 अगस्त 2025 जनपद में खरीफ सत्र 2025-26 के लिए यूरिया, पोटाश एवं सुपर फास्फेट जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। किसानों की मांग के अनुसार इस सप्ताह जनपद को 22,222 बोरी यूरिया, 8,000 बोरी पोटाश तथा 8,000 बोरी सुपर फास्फेट प्राप्त हो चुकी है। जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और आवश्यकतानुसार आपूर्ति लगातार की जा रही है।
जिलाधिकारी श्री आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में प्रतिदिन प्रातः जिला कृषि अधिकारी एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ उर्वरकों की आपूर्ति, वितरण व उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है। रेलवे रैक व सड़क मार्ग से उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी है, जिससे किसानों को समय से खाद मिल सके।
खरीफ 2025 की प्रमुख उपलब्धियाँ (अगस्त तक):
यूरिया: लक्ष्य 22,910 मी. टन | उपलब्धता 46,825 मी. टन | वितरण 37,071 मी. टन
डीएपी: लक्ष्य 11,210 मी. टन | उपलब्धता 11,801 मी. टन | वितरण 1,987 मी. टन
एमओपी: लक्ष्य 380 मी. टन | उपलब्धता 441 मी. टन | वितरण 374 मी. टन
एनपीके: लक्ष्य 3,200 मी. टन | उपलब्धता 2,782 मी. टन | वितरण 603 मी. टन
उक्त आँकड़े दर्शाते हैं कि जनपद में उर्वरकों की आपूर्ति लक्ष्य से कहीं अधिक है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई
जिलाधिकारी के निर्देश पर निर्धारित मात्रा से अधिक यूरिया देने वाले 7 खुदरा विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। इनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
1. में० कुशवाह खाद भण्डार, झूटगंज
2. यादव कृषि सेवा केन्द्र, अमृतपुर
3. मोहन ट्रेडर्स, जैनापुर
4. खुशी कृषि सेवा केन्द्र, राजपुर
5. में० कैलाश चन्द्र खाद भण्डार, अमलैया मुकेरी
6. में० अंशुल ट्रेडर्स, नवादा
7. यदुवंशी खाद भण्डार, कायमगंज
किसानों के लिए आवश्यक निर्देश:
उर्वरक खरीदते समय खतौनी व आधार कार्ड साथ अवश्य लाएं।
उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर संतुलित मात्रा में करें।
उर्वरक वितरण पीओएस मशीन से किया जाएगा और रसीद देना अनिवार्य है।
रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड एवं प्रमाणित बिक्री रजिस्टर दुकानों पर अनिवार्य रूप से लगे होने चाहिए।
गलत वितरण पर सख्त कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विक्रेता द्वारा उर्वरक वितरण में गड़बड़ी, जबरन टैगिंग, बिना रसीद बिक्री या अधिक कीमत वसूली की जाती है, तो उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
जनपद में आगामी आलू बुवाई सत्र को ध्यान में रखते हुए डीएपी एवं एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन किसानों को भरोसा दिलाता है कि किसी भी स्थिति में उर्वरकों की कमी नहीं होने दी जाएगी। किसानों से अपील है कि वे आवश्यकतानुसार ही उर्वरक खरीदें और अनावश्यक भंडारण से बचें।
