नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 अगस्त 2025 लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी द्वारा आज दिनांक 07 अगस्त 2025 को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई, जिसका विषय था:
“The foundation of the Constitution is the vote, Vote has been destroyed”
(संविधान की नींव वोट है, और यह वोट प्रणाली नष्ट की जा चुकी है)।
इस दौरान उन्होंने देशभर में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को उजागर करते हुए दो नागरिकों के नाम एक से अधिक राज्यों की विधानसभाओं की मतदाता सूची में दर्ज होने का दावा किया।
श्री राहुल गांधी द्वारा उठाए गए प्रमुख आरोप:
उन्होंने दावा किया कि दो व्यक्तियों —
1. श्री आदित्य श्रीवास्तव पुत्र श्री एस.पी. श्रीवास्तव (EPIC No: FPP6437040)
2. श्री विशाल सिंह पुत्र श्री महीपाल सिंह (EPIC No: INB2722288)
— के नाम एक से अधिक राज्यों की विधानसभाओं में दर्ज हैं, जो निर्वाचन प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
श्री गांधी के अनुसार, प्राप्त आंकड़े दिनांक 16 मार्च 2025 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट से निकाले गए थे।
विस्तृत विवरण उनके द्वारा बताए अनुसार:
श्री आदित्य श्रीवास्तव का नाम कथित रूप से निम्नलिखित स्थानों पर दर्ज है:
मुंबई सब अर्बन – विधानसभा 158 जोगेश्वरी पूर्व, बूथ संख्या 197, क्रम संख्या 877
बैंगलोर अर्बन – विधानसभा 174 महादेवपुरा, बूथ संख्या 458, क्रम संख्या 1265
बैंगलोर अर्बन – बूथ संख्या 459, क्रम संख्या 678
लखनऊ – विधानसभा 173 लखनऊ पूर्व, बूथ संख्या 84, क्रम संख्या 630
श्री विशाल सिंह का नाम बताया गया इन स्थानों पर दर्ज:
बैंगलोर – विधानसभा 174 महादेवपुरा, बूथ संख्या 513, क्रम संख्या 926
बैंगलोर – बूथ संख्या 321, क्रम संख्या 894
वाराणसी – विधानसभा 390 वाराणसी कैंट, बूथ संख्या 82, क्रम संख्या 516
सत्यापन में मिला भिन्न परिणाम:
राहुल गांधी के द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त दावे की पुष्टि के लिए 07 अगस्त 2025 को निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर इन दोनों EPIC नंबरों द्वारा जांच की गई, जिसमें निम्न तथ्य सामने आए:
श्री आदित्य श्रीवास्तव (FPP6437040) का नाम केवल बैंगलोर अर्बन की विधानसभा 174 महादेवपुरा के बूथ संख्या 458, क्रम संख्या 1265 पर दर्ज पाया गया।
श्री विशाल सिंह (INB2722288) का नाम भी केवल बैंगलोर की विधानसभा 174 महादेवपुरा के बूथ संख्या 513, क्रम संख्या 926 पर ही दर्ज मिला।
दोनों व्यक्तियों का नाम उत्तर प्रदेश की किसी भी विधानसभा, जैसे लखनऊ पूर्व (173) या वाराणसी कैंट (390), में दर्ज नहीं है।
निष्कर्ष:
राहुल गांधी द्वारा 07 अगस्त को किए गए दावों की वर्तमान समय में सत्यता प्रमाणित नहीं हो सकी। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध अद्यतन जानकारी के अनुसार, दोनों मतदाताओं का नाम केवल कर्नाटक राज्य के एक ही विधानसभा क्षेत्र में ही पाया गया।
उत्तर प्रदेश की विधानसभाओं में उनका नाम मौजूद नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस दावे में उल्लिखित आंकड़े अप्रासंगिक या अद्यतन न होने के कारण भ्रामक सिद्ध हुए हैं।
क्या कहता है यह विवाद?
यह प्रकरण न केवल मतदाता सूची की शुद्धता पर चर्चा को जन्म देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लोकतांत्रिक मंचों पर प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों की पुष्टि अत्यंत आवश्यक है।
जहां एक ओर राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता का यह प्रयास स्वागतयोग्य है कि वे निर्वाचन प्रणाली की पारदर्शिता पर ध्यान दिला रहे हैं, वहीं तथ्यों की प्रामाणिकता की जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका और आगे की आवश्यकता:
यह विवाद एक बार फिर बताता है कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में:
मतदाता सूची की अद्यतन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है।
डुप्लिकेट EPIC नंबर और दोहरी प्रविष्टियों की पहचान के लिए मशीन लर्निंग व डाटा एनालिटिक्स का प्रयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर निर्वाचन आयोग को स्वतः संज्ञान लेकर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि मतदाता भ्रमित न हों।
समापन विचार:
भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद मत का अधिकार है, और उसकी पवित्रता बनाए रखना हर राजनीतिक दल, हर सरकारी संस्था और हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
इस घटना से यह सीख मिलती है कि तथ्यात्मक जांच के बिना कोई भी दावा भ्रांति फैला सकता है और इससे जनविश्वास को नुकसान पहुंच सकता है।
विश्वसनीयता और जिम्मेदारी — यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।
