लोकसभा चुनाव में 25 साल बाद बसपा एक बार फिर समाजवादी पार्टी के साथ मैदान में है। पिछले चुनाव में बसपा को एक सीट भी नहीं मिल पाई थी, इस लिहाज से यह चुनाव उसके लिए काफी अहम है। इस बार बसपा की सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित चुनावी रणनीति की भी कड़ी परीक्षा होगी। पार्टी के लिए बदले हालात में सामाजिक समीकरणों को साधना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। दलित-यादव को साथ लाना आसान नहीं यूपी के चुनाव में जातीय समीकरण बहुत मायने रखते हैं। माना जा रहा…
