फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज) 01 अगस्त 2025 द्वितीयक विवाद समाधान प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फर्रुखाबाद ने जनपद में मध्यस्थता एवं सुलह समझौता केन्द्र के सुदृढ़ीकरण हेतु सक्षम मीडियेटर्स (मध्यस्थों) का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। यह कार्यवाही माननीय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य दीवानी वाद, वैवाहिक विवाद, शमनीय आपराधिक प्रकरण, वाणिज्यिक विवाद आदि के शीघ्र एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण हेतु एक अनुभवी और प्रशिक्षित मध्यस्थ टीम का गठन करना है।
मध्यस्थ बनने के लिए आवश्यक योग्यताएं:
उत्तर प्रदेश सिविल प्रक्रिया जिला न्यायालय मध्यस्थता नियमावली 2021 के अनुसार निम्नलिखित श्रेणियों के व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं:
ऐसे अधिवक्ता जिनके पास न्यूनतम 10 वर्षों का विधिक अभ्यास का अनुभव हो।
सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश या अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश।
विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत ऐसे विशेषज्ञ/वृत्तिक, जिनके पास 15 वर्षों का अनुभव हो और जो विधिक प्रक्रिया से परिचित हों।
सभी आवेदकों को यह उपक्रम देना अनिवार्य है कि वे भारत के उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
अपात्रता की शर्तें:
दिवालिया या मानसिक रूप से अयोग्य घोषित व्यक्ति।
जिनके विरुद्ध किसी न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया गया हो।
जो नैतिक अधमता से संबंधित अपराधों में दोषसिद्ध हों।
जिन पर अनुशासनिक कार्यवाही लंबित हो या सजा दी जा चुकी हो।
अन्य वह व्यक्ति जिन्हें उच्च न्यायालय द्वारा अनुपयुक्त घोषित किया गया हो।
मध्यस्थ की भूमिका:
मध्यस्थ का कार्य पक्षकारों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद के समाधान को बढ़ावा देना होगा। वह किसी पक्ष पर समझौते की कोई शर्त नहीं थोपेगा, बल्कि पारस्परिक सहमति से समाधान की दिशा में मार्गदर्शन करेगा। भ्रांतियों को स्पष्ट करना, प्राथमिकताओं की पहचान और समाधान के क्षेत्र तलाशना मध्यस्थ की अहम जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।
आवेदन प्रक्रिया:
उपरोक्त योग्यताएं रखने वाले इच्छुक अभ्यर्थी 05 अगस्त 2025 तक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन दर्जा विधिक सेवा प्राधिकरण, फर्रुखाबाद के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से या पंजीकृत डाक के माध्यम से जमा कर सकते हैं।
यह भर्ती प्रक्रिया न्यायिक प्रणाली में वैकल्पिक समाधान विधियों को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल न्याय प्रक्रिया को गति मिलेगी, बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्द भी बना रहेगा।
