गोला गोकर्णनाथ : ( द दस्तक 24 न्यूज ) गोला गोकर्णनाथ कंजा स्थित हनुमान मंदिर कंजा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राजकुमार जी (विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख, सीतापुर विभाग) ने समाज से एकजुट, जागरूक और संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करना है।
बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो हजार वर्षों में विश्व में अनेक सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक प्रयोग हुए, किंतु वे मानवता को स्थायी सुख और शांति नहीं दे सके। आज पूरी दुनिया आशा की दृष्टि से भारत की ओर देख रही है कि वह अपनी सनातन संस्कृति के मूल्यों के माध्यम से मानवता को नई दिशा दे सके। संगठन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी समाज तब तक सशक्त नहीं बन सकता, जब तक वह संगठित न हो। इतिहास के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि संगठित समाज ही परिवर्तन लाने में सक्षम होता है। रामचरितमानस और अन्य ग्रंथों के उद्धरणों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समर्थ और संगठित समाज ही अपने मूल्यों की रक्षा कर सकता है।
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनि अपने समय के महान वैज्ञानिक और विचारक थे। खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, गणित और भाषा विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भारत का योगदान विश्व को मार्गदर्शन देता रहा है। नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सदियों तक वैश्विक ज्ञान का केंद्र रहा है।
कार्यक्रम में सामाजिक समरसता को समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया गया। इस अवसर पर पांच प्रमुख संकल्पों का आह्वान किया गया— एक मंदिर, एक श्मशान, एक जलाशय और एक पंगत । भाषा, भूषा, भोजन, भ्रमण और भवन में सांस्कृतिक चेतना का वास । अपने पूरे परिवार के साथ रात्रि भोजन । सिंगल यूज़ प्लास्टिक का त्याग, जल संरक्षण और वृक्षारोपण;तथा प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन। युवाओं की भूमिका पर विशेष चर्चा करते हुए कहा गया कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है। उन्हें केवल भौतिक सफलता तक सीमित न रहकर सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि केवल हर पांच वर्ष में मतदान करना पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज को निरंतर सक्रिय और सजग रहना होगा।
कार्यक्रम के अंत में भगवद्गीता के संदेशों का उल्लेख करते हुए समाज से भय, आलस्य और आपसी विभाजन जैसी दुर्बलताओं को त्यागकर एकजुट होने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और नैतिकता का मार्ग दिखाएगा।
कार्यक्रम का समापन “भारत माता की आरती” एवं समरसता भोज के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत आदित्येश्वरानंद बाबा (हनुमान मंदिर, कंजा) ने की तथा मातृशक्ति के रूप में उर्मिला शर्मा जी (संचालिका, शिशु वाटिका, गोला) ने मंच पर प्रतिनिधित्व किया। इस कार्यक्रम की जानकारी कार्यक्रम संयोजक महेंद्र वर्मा एवं सह संयोजक अमित वर्मा ने दी।
लखीमपुर खीरी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिंदू सम्मेलन में समाज को संगठित होने का आह्वान, सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया गया जोर
