दिनांक 25.01.2019 को वादी श्री सुनील कुमार पुत्र चन्द्रपाल नि0 बरी बगवास थाना सिकन्दरपुर वैश्य जनपद कासगंज द्वारा लिखित तहरीर देकर थाना पर अवगत कराया गया कि अभियुक्त 1. राजाराम पुत्र डालचन्द 2. रेवाराम पुत्र बिहारीलाल नि0गण बरी बगवास थाना सिकन्दरपुर वैश्य ने वादी के पिता को जाति सूचक गाली गलौच कर गोली मार दी जिससे वादी के पिता की मृत्यु हो गयी । प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना सिकन्दरपुर वैश्य पुलिस द्वारा मु0अ0सं0- 11/2019 धारा 302 भादवि व 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट पंजीकृत किया गया । विवेचना के क्रम में थाना सिकन्दरपुर वैश्य पुलिस द्वारा अभियुक्तगण उपरोक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया । थाना सिकन्दरपुर वैश्य पुलिस द्वारा साक्ष्य संकलन की कार्यवाही पूर्ण करते हुए गुणवत्तापूर्ण विवेचना सम्पादित कर अभियुक्तगण के विरुद्ध आरोप पत्र दिनांक 08.04.2019 को माननीय न्यायालय प्रेषित किया गया । हत्या जैसे जघन्य अपराध में पुलिस अधीक्षक कासगंज सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक कासगंज श्री राजेश भारती के पर्यवेक्षण में थाना सिकन्दरपुर वैश्य पुलिस व मॉनिटरिंग सेल द्वारा प्रभावी पैरवी की गयी व समस्त गवाहों को समय से माननीय न्यायालय के समक्ष उपस्थित कराया गया । जिला शासकीय अधिवक्ता, श्री लोकेश कुमार एवं कोर्ट पैरोकार का0 लाखन सिंह द्वारा प्रभावी पैरवी की गई । अभियोजन व पुलिस की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरुप आज दिनांक 30.08.2025 को माननीय न्यायालय कासगंज द्वारा दोनों अभियुक्तगण राजाराम व रेवाराम उपरोक्त को धारा 302 भादवि व 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट में दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है । अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर अभियुक्तगण को 01-01 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास से दण्डित किया गया है । कासगंज पुलिस की उत्कृष्ट विवेचनात्मक कार्यवाही एवं मॉनिटरिंग सेल व अभियोजन की सशक्त पैरवी से उक्त हत्या व एससी/एसटी एक्ट के जघन्य अपराध में अभियुक्तगण को सजा दिलाये जाने में सफलता प्राप्त हुई है । परिणाम स्वरूप पीड़ित परिवार एवं आमजन द्वारा माननीय न्यायालय से न्याय मिलने पर पुलिस एवं न्यायालय के प्रति विश्वास व्यक्त किया है । न्याय मिलने पर आम जनता में न्यायालय एवं पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है ।
कासंगज : हत्या व एससी/एसटी एक्ट के अभियोग में अभियुक्तगण को आजीवन कारावास व 20-20 हजार रूपये के अर्थदण्ड से किया गया दण्डित
