प्रयागराज में सम्राट अशोक के शिलालेखों की प्रतिकृतियों का लोकार्पण, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने किया अनावरण

प्रयागराज:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 मार्च 2026 उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जनपद के अरैल (नैनी) स्थित सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार में प्रियदर्शी सम्राट अशोक महान के ऐतिहासिक शिलालेखों की प्रतिकृतियों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, बौद्ध भिक्षु और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का समाजसेवी अरविंद महरा तथा उनके समर्थकों द्वारा माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात डिप्टी सीएम ने बौद्ध विहार परिसर में स्थापित सम्राट अशोक के विभिन्न स्थानों से प्राप्त शिलालेखों की प्रतिकृतियों का अनावरण किया। इन शिलालेखों पर अंकित संदेशों में भगवान बुद्ध के उपदेशों के साथ-साथ मानवता, नैतिकता और लोककल्याण की भावना को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध के संदेश किसी भी धर्म के विपरीत नहीं हैं, बल्कि वे सर्वकालिक और सार्वभौमिक हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध के उपदेश मानवता को मैत्री, करुणा और दया का मार्ग दिखाते हैं और इन्हीं मूल्यों से समाज में समरसता और शांति स्थापित होती है। उन्होंने सम्राट अशोक द्वारा धम्म के प्रचार-प्रसार के प्रयासों को भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण विरासत बताया।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष बृजेश कुमार मौर्य ने की, जबकि संचालन बौद्ध कम्युनिटी इंटरनेशनल प्रयागराज के जी.एस. शाक्य ने किया। संस्था के अध्यक्ष विनोद विक्रम ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। वहीं अतिथियों का स्वागत भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं संस्था के संरक्षक रणजीत सिंह द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में विधायक वाचस्पति, पीयूष रंजन निषाद, जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता, राकेश राजेश शुक्ला, निर्मला पासवान, महेंद्र प्रताप कुशवाहा, राजेश कुशवाहा, अजय शर्मा, डी.डी. मौर्य, लल्लू लाल कुशवाहा, रणविजय सिंह, मयंक यादव और राकेश जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सम्राट अशोक के शिलालेख भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। इन शिलालेखों के माध्यम से सम्राट अशोक ने समाज को धम्म, नैतिकता, अहिंसा और लोककल्याण का संदेश दिया था। प्रयागराज में इन शिलालेखों की प्रतिकृतियों की स्थापना का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मानवता के मूल्यों से परिचित कराना है।

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