फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 24 जून 2025 तथागत संभ्रांत नागरिक सामाजिक संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक बाईपास स्थित आरपी पैलेस में संपन्न हुई। बैठक में वाईबीएस (YBS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्र बौद्ध ने महाबोधि महाविहार की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि अब समय आ गया है कि बौद्धों की इस पवित्र धरोहर का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
उन्होंने घोषणा की कि 28 जून 2025 को दोपहर 2 बजे YBS सेंटर, संकिसा उत्तर प्रदेश में इस विषय पर एक दिवसीय चिंतन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के बौद्ध चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन भाग लेंगे।
श्री बौद्ध ने बताया कि तथागत गौतम बुद्ध को 563 ईसा पूर्व बिहार के उरुवेला (वर्तमान बोधगया) में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद सम्राट अशोक ने 230 ईसा पूर्व उसी स्थान पर महाबोधि महाविहार की स्थापना की, जो आज भी दुनिया भर के बौद्धों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
उन्होंने चिंता जताई कि आज़ादी के बाद भी बौद्धों की इस विश्व धरोहर पर बौद्ध समुदाय का पूर्ण अधिकार नहीं है। वर्ष 1949 में बनाए गए BT एक्ट के अंतर्गत गठित महाविहार प्रबंधन समिति में 4 हिंदू, 4 बौद्ध और एक अध्यक्ष (जो केवल हिंदू जिलाधिकारी हो सकता है) का प्रावधान किया गया है। इस एक्ट को लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए:
बौद्ध स्थल होने के बावजूद समिति में आधे सदस्य हिंदू क्यों?
अध्यक्ष पद के लिए केवल हिंदू जिलाधिकारी की अनिवार्यता क्यों?
महाविहार परिसर को अतिक्रमण से मुक्त क्यों नहीं किया गया?
क्या अन्य धर्म स्थलों पर ऐसा दोहरा प्रबंधन होता है?
उन्होंने कहा कि यह बौद्धों की आस्था के साथ अन्याय है और इसे अब सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि श्रीलंका के अनागारिक धम्मपाल और जापान के भंते मुरेई समई जैसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध नेताओं द्वारा भी वर्षों से उठाया जा रहा है।
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि BT एक्ट 1949 को संशोधित किया जाए और महाबोधि महाविहार का संपूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए। इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए देशभर में जनजागरण किया जाएगा और केंद्र सरकार से इस विषय में स्पष्ट नीति की मांग की जाएगी। श्री बौद्ध ने सभी बौद्ध अनुयायियों, संगठनों और समाजसेवियों से अपील की कि वे इस अभियान में तन-मन-धन से सहयोग करें और अपनी विरासत की रक्षा हेतु संगठित हों।
