फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 05 दिसम्बर 2025 उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन (उत्तर प्रदेश) द्वारा विकास खण्ड मोहम्मदाबाद, जनपद फर्रुखाबाद के पदाधिकारियों ने अपनी बहुप्रतीक्षित समस्याओं एवं मांगों को लेकर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन खण्ड विकास अधिकारी मोहम्मदाबाद के माध्यम से जिलाधिकारी फर्रुखाबाद को प्रेषित किया गया।
संगठन ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण विकास की धुरी माने जाने वाले क्षेत्रीय ग्राम सचिवों (ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी) पर मूल विभागीय दायित्वों के अतिरिक्त बिना किसी संसाधन के अन्य विभागों के भारी-भरकम कार्य थोपे जा रहे हैं, जिससे कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है। साथ ही हाल ही में लागू की जा रही ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को अव्यवहारिक बताते हुए तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की गई।
ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली पर आपत्ति – “फील्ड कार्य में संभव नहीं”
ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम सचिव का कार्य पूरी तरह फील्ड आधारित है, जिसका दायरा एक नहीं बल्कि 4 से 9 ग्राम पंचायतों तक फैला होता है। ऐसे में किसी एक निश्चित स्थान से प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना व्यवहारिक नहीं है।
सचिवों ने तर्क दिया कि–किसी भी स्तर पर कार्यालय अध्यक्ष (जैसे खण्ड विकास अधिकारी, जिला अधिकारी) की उपस्थिति अंकित कराने का कोई प्रावधान नहीं है, फिर केवल ग्राम पंचायत सचिवों पर यह बाध्यता क्यों?
सचिवों को छुट्टियों, राष्ट्रीय पर्वों, दैवीय आपदाओं, रात्रिकालीन कार्यक्रमों, आकस्मिक निरीक्षणों एवं असमय ज़ूम मीटिंग्स तक में बुलाया जाता है—ऐसे में ऑनलाइन उपस्थिति अव्यवहारिक है।
शासन द्वारा दिया गया कोई आधिकारिक फोन या सिम उपलब्ध नहीं है। व्यक्तिगत मोबाइल में थर्ड पार्टी ऐप की अनुमति देना निजता का उल्लंघन एवं साइबर सुरक्षा जोखिम पैदा करता है।
गैर-विभागीय कार्यों का बढ़ता बोझ – “29 से अधिक योजनाएँ एक सचिव के जिम्मे”
ज्ञापन में बताया गया कि आज ग्राम सचिवों को अपने मूल विभागीय कार्यों से अधिक अन्य विभागों के कार्यों के लक्ष्यों और दबावों से जूझना पड़ रहा है।
सचिवों पर वर्तमान में किसानों की रजिस्ट्री, एग्री-सर्वे, फैमिली आईडी सत्यापन, आयुष्मान कार्ड, पेंशन सत्यापन, गौशाला प्रबंधन, जलस्रोतों की गणना, पराली प्रबंधन, नीरा एवं नेडा कार्यों से लेकर स्टैटिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटियों तक सौंप दी गई हैं।
सचिवों ने यह भी कहा कि–व्हाट्सएप्प/मेल आधारित आदेश प्रतिदिन बदलते रहते हैं, जिससे कार्ययोजना बनाना असंभव हो गया है। बिना संसाधनों के इतने लक्ष्यों का दबाव दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है।
अन्य विभागों के कर्मचारी (लेखपाल, कृषि सहायक, अध्यापक आदि) केवल अपने विभागों के कार्य करते हैं, पर सचिवों पर सबका भार डाला गया है।
व्यवस्था सुधार के लिए मुख्य मांगें
1. ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली तत्काल स्थगित की जाए
जब तक सभी स्तरों पर एकसमान व्यवस्था, संसाधन एवं तकनीकी सुरक्षा उपलब्ध न हो जाए—तब तक उपस्थिति प्रणाली लागू न की जाए।
2. सचिवों को केवल पंचायत एवं ग्राम्य विकास विभाग के कार्य ही दिए जाएँ
हर विभाग का कार्य उसके संबंधित क्षेत्रीय कर्मचारी को सौंपने की मांग की गई।
3. वाहन भत्ता, मोबाइल भत्ता एवं CUG सिम उपलब्ध कराए जाएँ
ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले सचिवों को अब तक यह सुविधा नहीं मिल सकी है।
4. शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक की जाए
सचिवों ने कहा कि करोड़ों की योजनाओं का प्रबंधन करने वाले कर्मचारियों के लिए इंटरमीडिएट योग्यता अपर्याप्त है। वेतनमैट्रिक्स 05 देने की माँग की गई।
5. सहायक विकास अधिकारी (आईएसबी) एवं (पंचायत) के पदों पर समान ग्रेड-पे
वर्तमान में समान योग्यता होने के बावजूद अलग-अलग ग्रेड वेतन दिया जा रहा है।
6. स्थानीय भाषा, परम्परा एवं संस्कृति वाले जिले में ही तैनाती
सचिवों ने कहा कि ग्रामीण मनोविज्ञान, बोली और परम्परा समझने वाला कार्मिक ही योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर सकता है।
7. ग्राम पंचायतों की ऑडिट हेतु CA/सोशल ऑडिटर का विकल्प
दशकों से लंबित ऑडिट आपत्तियों के शीघ्र निस्तारण हेतु यह व्यवस्था मांगी गई है।
8. मनरेगा से संबंधित शासनादेश 22 अगस्त 2022 के सम्यक अनुपालन की मांग
एफटीओ जनरेट करने व भुगतान प्रबंधन में खण्ड विकास अधिकारी व लेखाकार की समान जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
संगठन ने संवाद की मांग भी रखी
ज्ञापन के अंत में संगठन ने शासन से आग्रह किया कि ग्राम सचिवों की समस्याओं पर शासन-स्तरीय औपचारिक संवाद स्थापित किया जाए और समाधान निकालकर कर्मचारियों की कार्यक्षमता व पारदर्शिता को बनाए रखा जाए।
उपस्थित पदाधिकारी
विनय सिंह, रामवीर सिंह, अवधेश बाथम, शिवपाल सिंह, अजय कुमार द्विवेदी, राजीव गौतम, संदेश यादव, विवेक कुमार, संजय कुमार सक्सेना, अजय कुमार साहू, मनीष साहू, मणि कुमार सोनी, अनुराग सिंह सहित अनेक ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी उपस्थित रहे।
यह ज्ञापन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम सचिवों के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं और शासन के स्तर पर जल्द समाधान की आवश्यकता को रेखांकित करता है। कर्मचारी आशा कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
