फर्रूखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 दिसंबर 2025 टाउन हॉल से चिलसरा रोड की ओर बह रहे अधूरे और गंदे नालों का पानी रामपुर ढपरपुर न्याय पंचायत की 8 ग्राम सभाओं के किसानों के लिए आफत बन गया है। छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी ज़मीन पर सब्जी की खेती करके घर चलाने वाले किसान अब नाले के गंदे पानी, बिखरी हुई सिल्ट और बढ़ती बेमारियों से जूझ रहे हैं — जबकि नगर पालिका और उसके नेतृत्व पर बेरूखी व अनदेखी का गंभीर आरोप है।
तीनों नाले अधूरे, किसानों की उपज और आय दोनों प्रभावित
टाउन हॉल के आसपास से चिलसरा मार्ग की ओर जाने वाले तीन नाले कई सालों से अधूरे पड़े हैं। बरसात के मौसम में नाले ओवरफ़्लो कर खेतों में गंदा पानी भर देता है, जो सब्जी की फ़सल को नष्ट कर देता है और मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी कम कर देता है। प्रभावित गांवों के अधिकांश किसान छोटी-छोटी ज़मीनों पर ही आश्रित हैं; एक भी फसल नष्ट होने से घर का गुज़ारा दांव पर लग जाता है और कर्ज़ का चक्र बढ़ता है।
सफाई के बाद भी समस्या जस की तस — निकाली सिल्ट रोड किनारे पड़ी
हाल के सफाई अभियान में नगरपालिका की मशीनों द्वारा नाले से जो सिल्ट (मलवा) निकाला गया, वह अभी भी रोड के किनारे पड़ा हुआ है। इससे आसपास रहने वाले किसान, मजदूर और बच्चों की हालत और बिगड़ी है — बदबू, कीड़े-पतंगे, और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी कहते हैं कि सड़कों पर फैली यह गंदगी यह दर्शाती है कि नगर पालिका की समस्या के प्रति कितनी उदासीनता है। “हमारे बच्चे स्कूल से लौटकर बीमार पड़ जाते हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसी ने हमारी समस्या सुनने तक की जहमत नहीं उठाई,” एक किसान ने गुस्से और निराशा के साथ बताया।
प्रशासनिक नेतृत्व पर सवाल — पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान अध्यक्षा पर निंदा
किसानों का कहना है कि जिनको कुशल नेतृत्व वाला बताया जाता रहा, वे नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान अध्यक्षा महोदय/महोदया — किसानों की परेशानियों के प्रति असफल साबित हुए हैं। टाउन हॉल से चिलसरा रोड तक नालों का अधूरा निर्माण, सफाई के बाद मलवा का सड़क पर फेंका जाना और समय पर स्थायी निवारक उपाय न होना — इन सभी पर नगरपालिका के नेतृत्व की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है।
प्रभावित क्षेत्र — बढ़पुर ब्लॉक: रामपुर ढपरपुर न्याय पंचायत की 8 ग्राम सभाएं
बढ़पुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली रामपुर ढपरपुर न्याय पंचायत की आठ ग्राम सभाएं (नोट: स्थानीय नामों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराएँ) गंभीर रूप से प्रभावित हैं। यहाँ के किसान सब्जी की खेती पर निर्भर हैं; अब फसलों के नष्ट होने और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण परिवार कर्ज में डूब रहे हैं और घर की अर्थव्यवस्था संकट में है।
स्वास्थ्य व सामाजिक प्रभाव
नाले से उठती दुर्गंध और गंदगी के कारण आसपास के लोगों में पीठ, पेट और श्वसन संबंधी समस्याओं की शिकायतें बढ़ रही हैं। बच्चों में पेट संबंधी विकार और त्वचा रोग सामान्य बात हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि पहली बार में छोटी-छोटी बीमारी के रूप में दिखने वाली समस्याएँ भविष्य में गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती हैं।
किसानों की माँगें — सब्जी उपज बचाने और स्वास्थ्य सुरक्षित करने हेतु तत्काल कदम
किसानों व ग्रामीणों की असमयित माँगें इस प्रकार हैं:
1. तीनों नालों का तत्काल और स्थायी मरम्मत/निर्माण — नाले का पूरा ढांचा बनाकर सीवर का समुचित प्रबंध।
2. सफाई के दौरान निकाली गई सिल्ट का तुरंत निस्तारण और सड़क/खेतों की सफाई।
3. प्रभावित किसानों को त्वरित आर्थिक राहत/कर्जमाफी या समयबद्ध अनुदान ताकि उनका परिवार और खेती बच सके।
4. आसपास के लोगों के स्वास्थ्य जांच व निःशुल्क चिकित्सा शिविर के आयोजन।
5. नगरपालिका अध्यक्षा और संबंधित अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट समय-सीमा घोषित कर समस्या का समाधान सुनिश्चित करना।
नगर पालिका की प्रतिक्रिया व जिम्मेदारी
स्थानीय प्रशासन व नगर पालिका परिषद पर स्पष्ट भूमिका है—नाले की नियमित निगरानी, समय पर सफाई, और निकाले गए मलवे का सुरक्षित निस्तारण उनकी जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी निष्क्रिय रहें या दायित्यों से पलायन करें तो स्थिति और विकराल हो सकती है। जनता का विश्वास और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी दांव पर लग जाएगी।
निष्कर्ष — शांतिपूर्ण, संगठित और कानूनी माँग जरूरी
यह समस्या केवल एक प्राकृतिक गड्ढे या अस्थायी असुविधा नहीं है — यह किसानों की आजीविका, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता का प्रश्न है। समय रहते यदि कठोर और ठोस कदम न उठाये गये, तो स्थानीय समुदाय के आक्रोश को नियंत्रित रखना कठिन होगा। इसके मद्देनजर सार्वजनिक हित में सुझाए जा रहे कुछ शांतिपूर्ण कदम हैं: विस्तारित जनसुनवाई, ज्ञापन/पीटीशन के माध्यम से अधिकारियोँ से माँगें, स्वास्थ्य शिविरों के लिये ज़िला प्रशासन से संपर्क, तथा मीडिया व जन-हित संगठनों के साथ समस्या को प्रमुखता से उठाना।
न्याय और जवाबदेही की माँग के साथ — फर्रुखाबाद के किसान अब हिम्मत से आवाज़ उठा रहे हैं। प्रशासन यदि शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई न करे तो गाँव-किसान स्वाभाविक रूप से संगठित होकर प्रभावकारी और शांतिपूर्ण आंदोलन की राह चुन सकते हैं — परन्तु वह आंदोलन तभी टिकाऊ होगा जब उसकी नींव साक्ष्यों, लोगों की व्यापक एकजुटता और कानूनी मार्गों के सही उपयोग पर हो।
