फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में माटीकला (गाय-भैंस की गोबर, मिट्टी आदि से बने उत्पादों की कला) को प्रोत्साहित करने एवं शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जनपद फर्रुखाबाद के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों एवं उनके परिवारों के बेरोजगार युवाओं के लिए यह योजनाएं वरदान साबित हो सकती हैं।
बोर्ड की तीन प्रमुख योजनाओं का लाभ लेकर शिल्प कला से जुड़े लोग न केवल अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं, बल्कि पारंपरिक कारीगरी को एक नए स्तर पर ले जा सकते हैं। आइए जानते हैं इन योजनाओं के बारे में विस्तार से:
1. मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना
इस योजना का उद्देश्य माटीकला से संबंधित पारंपरिक उद्यमों को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत उद्यमी मिट्टी से जुड़े व्यवसाय जैसे –
खिलौना निर्माण,
घरेलू उपयोग की वस्तुएं (जैसे सुराही, कुल्हड़, दीया आदि),
भवन निर्माण सामग्री (जैसे ईंट, टाइल आदि),
सजावटी उत्पाद (जैसे मूर्तियां, शो-पीस)
जैसे कार्यों के लिए उद्योग स्थापित कर सकते हैं।
मुख्य विशेषताएं:
₹10 लाख तक के प्रोजेक्ट पर बैंक से ऋण की सुविधा।
कुल प्रोजेक्ट लागत का केवल 5% अंशदान उद्यमी को देना होगा, शेष 95% बैंक ऋण के रूप में मिलेगा।
ऋण की अवधि 5 वर्ष निर्धारित है।
सरकार द्वारा 25% तक मार्जिन मनी सब्सिडी दी जाएगी, जिससे ऋण राशि की वापसी आसान हो जाएगी।
2. माटीकला टूलकिट वितरण योजना (वित्तीय वर्ष 2025-26)
इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करना है ताकि वे अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकें।
इस योजना के अंतर्गत:
30 लाभार्थियों को पावर चालित चाक (Electric Potter’s Wheel) वितरित किया जाएगा।
4 लाभार्थियों को पगमिल मशीन (Pagmill Machine) उपलब्ध कराई जाएगी।
वरीयता किन्हें मिलेगी?
पारंपरिक माटीकला कारीगर
कारीगरों के शिक्षित बेरोजगार परिजन
किसी विधा में प्रशिक्षण या प्रमाण पत्र प्राप्त अभ्यर्थी
स्व-रोजगार में रुचि रखने वाली कारीगर परिवार की महिलाएं
यह योजना न केवल रोजगार प्रदान करती है, बल्कि पारंपरिक शिल्प को तकनीकी रूप से सशक्त भी बनाती है।
3. माटीकला व्यवहारिक/शिल्पकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम
शिल्प कला में दक्षता बढ़ाने के लिए यह योजना प्रशिक्षण प्रदान करती है।
प्रशिक्षण की प्रमुख विधाएं: दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाना, सजावटी वस्तुओं का निर्माण, मिट्टी के खिलौने एवं मूर्तियाँ बनाना कटिंग, चित्रकारी, नक्काशी आदि कला कौशल
प्रशिक्षण स्थान:
मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र, पिपरौला, शाहजहांपुर
प्रशिक्षण अवधि के दौरान रहने, खाने व मानदेय की नियमित व्यवस्था
कैसे करें आवेदन?
इच्छुक अभ्यर्थी उपरोक्त योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
🌐 https://unmatikalaboard.in
ऑनलाइन आवेदन के उपरांत आवेदन पत्र को संबंधित प्रमाणपत्रों के साथ जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, ठंडी सड़क, फर्रुखाबाद में जमा करना अनिवार्य है।
अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:
जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, ठंडी सड़क, फर्रुखाबाद
कार्यालयीन समय में किसी भी कार्यदिवस पर संपर्क किया जा सकता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा माटीकला जैसे पारंपरिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए चलायी जा रही योजनाएं न केवल ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक हैं, बल्कि लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फर्रुखाबाद के इच्छुक शिल्पकारों एवं उद्यमियों से अपील है कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाएं।
