फर्रुखाबाद:जब से बुद्ध को जाना: भारत में ज्ञान की ज्योति और अज्ञान का विरोधाभास

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 08 अक्टूबर 2025: तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षाओं ने पूरी दुनिया में भारत की पहचान को न केवल मजबूती दी है बल्कि मानव कल्याण और ज्ञान के क्षेत्र में एक अमिट योगदान भी दिया है। यह सोचने की बात है कि जिस देश में ज्ञान की यह दिव्य ज्योति जली, वहां आज भी अज्ञान और निरक्षरता का अंधेरा पसरा है।

बुद्ध के बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के सिद्धांत केवल धार्मिक विचार नहीं हैं, बल्कि दार्शनिक, साहित्यिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों के विद्वानों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं। बुद्ध का संदेश खोज और ज्ञान के लिए प्रेरणा है, जिसे समझने और ग्रहण करने की क्षमता केवल वही रखते हैं जो सच्चे अर्थ में विद्वान हैं।

महेंद्र सिंह शाक्य लिखते हैं कि बुद्ध के ज्ञान को समझने पर पहले यह सूक्ष्म प्रतीत होता है, फिर विस्तार में समझ आता है और अंततः सम्पूर्ण ब्रह्मांड में उनका मोहक स्वरूप प्रकट होता है। उनके सम्यक विचार कानों में गूंजने लगते हैं और व्यक्ति अपनी तुच्छता को महसूस करता है। यह अनुभव हार में जीत और क्षणिक आत्मविमुखता में सच्चा सुख प्रदान करता है।

बुद्ध की शिक्षाओं को जानने और अनुभव करने वाला व्यक्ति केवल ज्ञानवान नहीं बनता, बल्कि अपने भीतर गहरे आत्मसाक्षात्कार और संतोष का अनुभव भी करता है। यही है बुद्ध की महानता और उनके धर्म की सार्वभौमिकता।

लेखक: महेंद्र सिंह शाक्य, बायपास रोड, बौद्ध नगर, नगला खैरबंद, फर्रुखाबाद