फर्रुखाबाद:संकिसा महोत्सव 2025 : करुणा, संस्कृति और सम्यक दृष्टि का भव्य संगम

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 11 अक्टूबर 2025 संकिसा नगरी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। संकिसा महोत्सव 2025 (स्वर्ग अवतरण समारोह) के दौरान जब तथागत भगवान बुद्ध, सम्राट अशोक महान और सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के जयघोष गूंजे तो पूरा वातावरण करुणा, शांति और मानवता के भावों से भर गया। यह दृश्य मानो पुनः भगवान बुद्ध के स्वर्ग से अवतरण का साक्षी बन गया हो।

5 एवं 6 अक्टूबर 2025 को आयोजित इस महोत्सव में जनसैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे—सभी में अपार उत्साह देखने को मिला। संपूर्ण नगरी बुद्धमय हो उठी थी। हर गली, हर चौराहा और हर विहार में श्रद्धा का वातावरण था।

धम्मदेशना, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम

बुद्ध विहारों में पूज्य बौद्ध भिक्षुओं द्वारा धम्मदेशना, पत्रांनि पाठ और अभिधम्म समारोह ने श्रद्धालुओं को धम्म की गहराइयों में डुबो दिया। वहीं साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में आयोजित विराट सम्यक कवि सम्मेलन ने अपनी भव्यता से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पदम सिंह ‘पदम’ ने की। मुख्य अतिथि रहे प्रोफेसर डॉ. त्रिमोहन तरल (आगरा कॉलेज, आगरा) और संचालन किया प्रसिद्ध ग़ज़लकार हरिओम सिंह विमल ने।

संयोजन का दायित्व संभाला बीबीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्र बौद्ध ने।

देशभर से पधारे कवि, कवियत्री और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से बुद्ध धम्म, करुणा और मानवता का संदेश पूरे हॉल में गूंजा दिया। श्रोताओं ने तालियों और मालाओं से उनका अभिनंदन किया।

मानसी स्मृति ग्रंथ’ का लोकार्पण और करुणा का क्षण

इस वर्ष का संकिसा महोत्सव कवि हरिगोविंद शाक्य ‘हरि’ के लिए अत्यंत भावनात्मक रहा। अपनी दिवंगत पत्नी मानसी की स्मृति में संपादित “मानसी स्मृति ग्रंथ” का मंच पर लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर विद्वान कवियों, साहित्यकारों और समाजसेवियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

कवि हरिगोविंद शाक्य ने अपनी ही ईजाद की गई ध्वनि पर एक भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भावविह्वल कर दिया। यह क्षण न केवल काव्य रस का, बल्कि आत्मीय करुणा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक बन गया।

मानवता का संदेश और समाज की एकजुटता

महोत्सव में जिला पंचायत अध्यक्ष आदरणीया प्रिया ओमकार शाक्य द्वारा पंचशील पट्टिका और “भगवान बुद्ध की जीवनी” भेंट कर कवि हरिगोविंद शाक्य का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में पूज्य भंते शीलरत्न, भंते धर्मपाल, भंते उपनंद और अन्य बौद्ध भिक्षुओं के प्रवचनों ने सभी को जीवन के वास्तविक अर्थ से परिचित कराया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों की सहभागिता रही — अखिल भारतीय शाक्य महासभा, सकर्म सर्वोदय समिति, महामाया ट्रस्ट, बीबीएस केंद्र सहित अनेक संस्थाओं ने आयोजन को सफल बनाया।

शोक से शक्ति तक – बुद्ध धम्म का वास्तविक प्रभाव

अपनी जीवनसंगिनी के वियोग के बावजूद कवि हरिगोविंद शाक्य ने इस महोत्सव को सेवा, संस्कृति और करुणा का अवसर बनाया।

वे कहते हैं — “अगर मैं केवल कवि होता तो शायद टूट जाता,

पर बुद्ध धम्म ने मुझे भीतर से संभाला,

करुणा और ध्यान ने मुझे पुनः जीवन दिया।”

उनकी इस दृढ़ता को अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों और मित्रों का समर्थन मिला, जिनमें प्रमुख रहे—डॉ. राम बक्स वर्मा, श्री कृष्ण आर्य, डॉ. नरेंद्र संगम, कवियत्री साधना यादव, आर.एस. कुशवाहा, सुमित शुक्ला, कैलाश चंद्र शाक्य, शिवराज सिंह शाक्य, आदित्य विक्रम सिंह, हरि शरण शाक्य एडवोकेट, सुरेश चंद दुबे ‘धक्कड़’, दीपमाला शाक्य ‘दीप’, तथा अनेक कवि-साहित्यकार और समाजसेवी।

संकिसा – करुणा का संदेश देने वाली पवित्र भूमि

मेला कमेटी के प्रमुख कर्मवीर शाक्य, भंते डॉक्टर धर्मपाल, भंते चेत सिक, भंते शीलरत्न सहित सभी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप दिया।

पूरे महोत्सव ने यह संदेश दिया कि संकिसा केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि करुणा, समानता और सम्यक जीवन का प्रतीक है।

समापन संदेश

संकिसा महोत्सव 2025 ने न केवल धार्मिक या सांस्कृतिक रूप से बल्कि मानवता की दृष्टि से भी नई ऊंचाइयां छुईं।

यह आयोजन उन सबके लिए प्रेरणा बन गया जो जीवन के दुखों से ऊपर उठकर धम्म, प्रेम और करुणा का मार्ग अपनाना चाहते हैं।

नमो बुद्धाय 🙏

हरिगोविंद शाक्य ‘हरि’

पूर्व प्रवक्ता, कवि एवं पर्यावरण प्रहरी

राष्ट्रीय सांस्कृतिक सचिव – अखिल भारतीय शाक्य महासभा (रजि.) दिल्ली

राष्ट्रीय प्रवक्ता – सकर्म सर्वोदय समिति (भारत)

ब्रांड एंबेसडर – स्वच्छ भारत मिशन

आदर्श नगर पंचायत, सिकंदरपुर, कन्नौज

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