फर्रुखाबाद: मंदिर व कब्रिस्तान के पास कूड़ा डंपिंग से भड़का जनाक्रोश, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 30 सितम्बर 2025 जनपद के थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के अंतर्गत मोहल्ला मेमरान में स्थित भोलेनाथ व दुर्गा जी के प्राचीन मंदिर के पास इन दिनों कूड़ा डंपिंग का मामला सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका के सफाई कर्मी कई मोहल्लों का कूड़ा यहीं लाकर डालते हैं, जिससे पूरे इलाके में गंदगी और बदबू फैल रही है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के मोहल्ले के निवासियों को भी इस गंदगी के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

धार्मिक स्थल व कब्रिस्तान के पास कूड़े का अंबार

मंदिर के बिल्कुल पास एक कब्रिस्तान भी स्थित है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो जाती है। श्रद्धालु व स्थानीय लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहते हैं कि ऐसे स्थान पर कूड़ा डालना न सिर्फ असंवेदनशील है, बल्कि आस्था का अपमान भी है। मंदिर और कब्रिस्तान के आसपास मक्खियों, मच्छरों और दुर्गंध के कारण लोगों का वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है।

प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार नगर पालिका व प्रशासन को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि सफाई कर्मियों को निर्देश देने के बजाय प्रशासन ने इस मामले को नजरअंदाज कर दिया है। सेवानिवृत्त जिला बचत अधिकारी लक्ष्मी नारायण गौतम, कैप्टन रामअवतार माथुर (सेवानिवृत्त फौजी), लाल सिंह, संगीत यादव, जागेन्द्र शाक्य, रमेश धोवी, सर्वेश कुमार, रामनिवास शास्त्री, माधवराम शाक्य, दीपक श्रीवास्तव, सुशील यादव, हदेश, प्राशु, अंकुर पाल, अक्षय सक्सेना, पारस शाक्य सहित मोहल्ले के दर्जनों लोगों ने सामूहिक रूप से कूड़ा हटाने और डंपिंग स्थल को तुरंत स्थानांतरित करने की मांग की है।

लोगों की मांग — तुरंत स्थानांतरण हो

मोहल्ला वासियों ने स्पष्ट कहा है कि मंदिर और कब्रिस्तान की धार्मिक महत्ता को देखते हुए कूड़ा डंपिंग स्थल को तत्काल स्थानांतरित किया जाए। यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

नगर पालिका का पक्ष

इस मामले में नगर पालिका प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों का मानना है कि वैकल्पिक डंपिंग स्थल की तलाश में समय लग रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल समय खींचने की नीति है और जिम्मेदार विभाग इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीर नहीं है।

निष्कर्ष

मामला केवल सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। यदि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो यह विवाद और गहरा सकता है और जनता का आक्रोश आंदोलन में बदल सकता है।