फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 11 अक्टूबर 2025 क्या आपको डायबिटीज या हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या है? अगर हां, तो संभव है कि आपने अपनी दिनचर्या से एक बेहद सरल और प्राकृतिक आदत — दातून — को भुला दिया हो!
सन 1990 से पहले भारत में डायबिटीज के मरीज कुल जनसंख्या का केवल 2-3% थे। हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां भी दुर्लभ थीं। लेकिन जैसे-जैसे लोगों ने आधुनिक जीवनशैली, बाजारू टूथपेस्ट और केमिकल माउथवॉश को अपनाया, बीमारियां हर घर में पहुंच गईं।
आज स्थिति यह है कि हर चौथा भारतीय डायबिटीज या हाइपरटेंशन से जूझ रहा है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि गांवों और आदिवासी इलाकों में, जहां लोग आज भी नीम, बबूल या काठे की दातून से दांत साफ करते हैं, वहां ये बीमारियां न के बराबर हैं।
दातून, डायबिटीज और हाइपरटेंशन का अनोखा कनेक्शन
आप सोच रहे होंगे — “मुंह की सफाई और डायबिटीज-हाइपरटेंशन का क्या संबंध?”असल में संबंध हमारे मुंह के अच्छे बैक्टिरिया से है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि हमारे मुंह में कुछ फायदेमंद बैक्टिरिया होते हैं —जैसे Actinomyces, Neisseria, Rothia और Veillonella —जो लार में मौजूद नाइट्रेट (NO₃⁻) को नाइट्राइट (NO₂⁻) और फिर नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में परिवर्तित करते हैं।
यह नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) शरीर में रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता को बनाए रखता है।
लेकिन बाजार के केमिकल टूथपेस्ट और माउथवॉश 99.9% कीटाणुओं को खत्म करने का दावा करते हैं — और यहीं से समस्या शुरू होती है। वे हानिकारक बैक्टिरिया के साथ-साथ अच्छे बैक्टिरिया को भी नष्ट कर देते हैं, जिससे NO का स्तर घट जाता है, और धीरे-धीरे शरीर हाइपरटेंशन और डायबिटीज की ओर बढ़ जाता है।
वैज्ञानिक प्रमाण क्या कहते हैं?
Journal of Clinical Hypertension (2004) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी हाई ब्लड प्रेशर का प्रमुख कारण है।
British Dental Journal (2018) की एक 3-वर्षीय स्टडी में यह पाया गया कि जो लोग दिन में दो बार माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं, उनमें डायबिटीज या प्री-डायबिटीज का खतरा 50% अधिक होता है।
वहीं Journal of Clinical Diagnosis and Research की रिपोर्ट बताती है कि नीम और बबूल की दातून Streptococcus mutans (दांत सड़ाने वाला बैक्टिरिया) को रोकती हैं, लेकिन अच्छे बैक्टिरिया को नुकसान नहीं पहुंचातीं।
दातून के प्राकृतिक फायदे
1. मुंह की दुर्गंध दूर करती है और दांतों को प्राकृतिक रूप से चमकदार बनाती है।
2. मसूड़ों को मजबूत करती है, जिससे पायरिया और ब्लीडिंग जैसी समस्याएं दूर रहती हैं।
3. NO उत्पादन करने वाले अच्छे बैक्टिरिया को सुरक्षित रखती है, जो रक्तचाप और शुगर नियंत्रण में मदद करते हैं।
4. लार का सेवन (जैसा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित है) शरीर में आवश्यक नाइट्रेट संतुलन बनाए रखता है।
5. कोई केमिकल, कोई साइड इफेक्ट नहीं!
Zane Ayurveda का मिशन: “प्रकृति से प्रगति तक”
Zane Pharmaceuticals के आयुर्वेदिक ब्रांड Zane Ayurveda का मानना है कि “हम जितना प्रकृति के करीब रहेंगे, उतना ही स्वास्थ्य के करीब पहुंचेंगे।” कंपनी का उद्देश्य आधुनिक जीवनशैली में छिपी बीमारियों से लोगों को बचाते हुए। प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उत्पादों के माध्यम से सेहत को बढ़ावा देना है। दातून जैसी सरल आदतें हमें न सिर्फ दांतों की बल्कि पूरे शरीर की सुरक्षा देती हैं।
अब वक्त है वापसी का!
केमिकल माउथवॉश और महंगे टूथपेस्ट छोड़िए —और अपनाइए दातून की देसी परंपरा, जो सदियों से भारतीय जीवनशैली का हिस्सा रही है।
पुरानी कहावत याद है —“बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय। मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद्य न जाय।“अर्थात्, जो व्यक्ति नियमित रूप से दातून करता है, उसे डॉक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ती!
संदेश यही है – लौटिए प्रकृति की ओर!
दातून अपनाइए, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से खुद को बचाइए, और दूसरों को भी जागरूक बनाइए।
स्वस्थ रहें, प्राकृतिक रहें!
