फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 20 सितंबर 2025 कृषि विज्ञान केन्द्र, जाजपुर बंजारा, मोहम्मदाबाद में आज समर्थ भारत–विकसित भारत@2047, समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश@2047 और समर्थ फर्रुखाबाद–विकसित फर्रुखाबाद@2047 के अन्तर्गत एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. विनोद कुमार तिवारी (सेवानिवृत्त), डॉ. बी.के. शर्मा वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र जाजपुर बंजारा, विनोद कुमार गौड़ मुख्य विकास अधिकारी, एस.के. तिवारी जिला विकास अधिकारी, अरविन्द मोहन मिश्र उप कृषि निदेशक, ब्रजेश कुमार सिंह जिला कृषि अधिकारी, डॉ. गुंजा जैन पर्यावरणविद, डॉ. धीरज कुमार शर्मा मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, राघवेन्द्र सिंह जिला उद्यान अधिकारी सहित अन्य कृषि एवं विकास विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री अरविन्द मोहन मिश्र, उप कृषि निदेशक द्वारा समस्त अतिथियों और दूर-दराज से आए हुए कृषक बन्धुओं का स्वागत करते हुए की गई। उन्होंने विभाग में संचालित सभी योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी और रबी फसलों जैसे तोरिया, राई/सरसों, चना, मटर, मसूर इत्यादि के निःशुल्क बीज मिनीकिट प्राप्त करने हेतु कृषकों को पोर्टल https://agridarshan.up.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग करने की प्रक्रिया समझाई।
डा. बी.के. शर्मा ने कृषक बन्धुओं को आलू का स्वयं बीज उत्पादन करने की सलाह दी, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लाभों पर भी जोर दिया, जिससे न केवल कृषक परिवार का स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि मृदा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेंगे।
श्री राघवेन्द्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी ने अवगत कराया कि संरक्षित खेती के लिए पालीहाउस और ग्रीनहाउस, टिशू कल्चर लैब व नर्सरी अपग्रेडेशन पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध है। इसके अलावा, मिनी कोल्डस्टोरेज और व्यक्तिगत मंडी स्थापित करने हेतु भी अनुदान की व्यवस्था है। इस समय विभाग आलू का बीज उपलब्ध करा रहा है और इच्छुक कृषक कार्यालय संपर्क कर सकते हैं।
श्री बी.के. सिंह, जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि जनपद में रबी फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है और कृषक अपनी जोत के अनुसार उनका उपयोग कर सकते हैं। डॉ. गुंजा जैन ने कृषकों को मृदा परीक्षण कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग करने का महत्व समझाया। उन्होंने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और रोजगार बढ़ाने का सुझाव दिया।
प्रगतिशील कृषक श्री वारिज राजपूत ने आलू की प्रोसेसिंग प्रजातियों को उगाने और जनपद में प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने का सुझाव दिया। श्री हरिनाथ ने जैविक उर्वरकों पर भी सरकार द्वारा अनुदान देने और देशी गौ-पालकों को प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव रखा। श्रीमती नारायणी देवी ने महिलाओं द्वारा मसरूम, धूपबत्ती, अगरबत्ती आदि उत्पादित करने एवं बाजार तक पहुंचाने की जानकारी साझा की। कृषक श्री कृपाल सिंह ने विकासखण्ड स्तर पर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना का सुझाव दिया। प्रो. डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने कृषकों को समझाया कि देश और राज्य का विकास मुख्यतः ग्रामों में निवास करने वाले कृषकों के हाथ में है। उन्होंने कृषकों को कम रासायनिक खादों और अधिक जैविक खाद के उपयोग की सलाह दी।
मुख्य विकास अधिकारी श्री विनोद कुमार गौड़ ने कृषकों को बताया कि वे अपने सुझाव क्यूआर कोड और लिखित रूप में कलेक्ट्रेट, विकास भवन और कृषि विज्ञान केन्द्र पर पहुंचा सकते हैं। जिला विकास अधिकारी श्री एस.के. तिवारी ने कृषकों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने और सुझाव शासन तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन उप कृषि निदेशक, फर्रुखाबाद द्वारा किया गया।
