फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 27 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश पुलिस की सख़्ती और शासन की जीरो टॉलरेंस नीति ने एक बार फिर बड़ा परिणाम दिया है। करीब 30 साल पुराने बहुचर्चित ठेकेदार शमीम हत्याकांड में माफिया अनुपम दुबे और उसके साथी बालकिशन उर्फ शिशु को आखिरकार अदालत ने आजीवन कारावास और 1,03,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामला क्या था?
26 जुलाई 1995 को दिनदहाड़े बाजार में PWD ठेकेदार शमीम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के पीछे माफिया अनुपम दुबे का नाम सामने आया था। पीड़ित के भाई नसीम पुत्र हनीफ, निवासी समधन, थाना गुरसहायगंज, जनपद कन्नौज ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
थाना कोतवाली फतेहगढ़ में मु.अ.सं. 333/1995, धारा 147/148/149/302 भादवि के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।
सजा
लगातार पैरवी और पुलिस की सक्रियता के बाद विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फर्रुखाबाद कोर्ट संख्या 04 ने 27 अगस्त 2025 को दोषसिद्ध अपराधियों —
अनुपम दुबे (माफिया, कुख्यात अपराधी)
बालकिशन उर्फ शिशु
को आजीवन कारावास की सजा और 1,03,000 रुपये प्रत्येक पर अर्थदंड लगाया।
जीरो टॉलरेंस नीति का असर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह बड़ा फैसला सामने आया।
डीजीपी राजीव कृष्ण (IPS) के नेतृत्व,
एडीजी जोन कानपुर आलोक सिंह (IPS) के निर्देशन,
डीआईजी कानपुर रेंज हरीश चंदर के पर्यवेक्षण,
तथा पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ आरती सिंह के नेतृत्व में प्रभावी पैरवी की गई।
अनुपम दुबे का आपराधिक इतिहास
वर्ष 1987 में अपराध जगत में कदम रखा।
अब तक 65 गंभीर मुकदमे हत्या, डकैती, रंगदारी, धोखाधड़ी, जमीन कब्जा, फिरौती जैसे अपराधों में दर्ज।
पुलिस ने इसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और एनएसए की कार्यवाही की।
गैंग डी-47 पंजीकृत किया गया।
1,71 अरब रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति कुर्क की गई।
परिवार के नाम 8 लाइसेंसी शस्त्र निरस्त कराए गए।
अनुपम दुबे पहले भी इंस्पेक्टर स्वर्गीय रामनिवास यादव की हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये अर्थदंड की सजा पा चुका है।
शिशु उर्फ बालकिशन का आपराधिक इतिहास
शमीम हत्या कांड (1995)
2004 में हत्या का मुकदमा
2017 में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मुकदमे
2023 में फतेहगढ़ में जालसाजी व अन्य धाराओं में मुकदमा
पुलिस और गवाहों की सुरक्षा
इस मामले में अपराधियों के आतंक के चलते लोग गवाही देने से डरते थे।
पुलिस ने गवाहों को Witness Protection Scheme के तहत सुरक्षा प्रदान की।
मुकदमे के ट्रायल में अवरोध न हो, इसके लिए पुलिस ने विशेष रणनीति बनाई और गवाहों को समय पर अदालत में पेश किया।
जनता में संदेश
माफिया अनुपम दुबे वर्षों तक फर्रुखाबाद, कन्नौज और आसपास के जिलों में आतंक का पर्याय रहा। पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय के इस फैसले के बाद आम जनता में यह संदेश गया है कि अपराध और अपराधियों पर कड़ी सज़ा सुनिश्चित की जाएगी।
👉 यह फैसला प्रदेश सरकार की “कानून का राज” और “अपराधियों पर सख्ती” की नीति को और मज़बूत करता है।
