फर्रुखाबाद:क्या लोकतंत्र खतरे में है? देश की विदेश नीति और आर्थिक निर्णयों पर उठ रहे सवाल- मोहन अग्रवाल

फर्रूखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 27 सितम्बर 2025 देश की मौजूदा परिस्थितियाँ कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर सरकार आर्थिक सुधारों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनता का एक बड़ा वर्ग सरकार की विदेश नीति, लोकतांत्रिक मूल्यों और कॉर्पोरेट घरानों की बढ़ती भूमिका पर चिंता जता रहा है।

विदेश नीति में टकराव का दौर

अमेरिका, सऊदी अरब और पड़ोसी देशों के साथ लगातार बढ़ते तनाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत किसी भी महाशक्ति के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा दिखाई नहीं दे रहा। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य में भारत की कूटनीतिक ताकत को कमजोर कर सकती है।

घरेलू मोर्चे पर लोकतंत्र पर बहस

सोनम वांगचुंग जैसे मामलों में बिना ठोस सबूत जेल भेजे जाने की घटनाएँ लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। नागरिकों और विपक्षी दलों का मानना है कि देश में असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है।

आर्थिक फैसलों पर कॉर्पोरेट का प्रभाव?

GST जैसे सुधारों को “उत्सव” के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन छोटे व्यापारियों और आम जनता के लिए यह कितना लाभकारी है, इस पर बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि सरकार की नीतियों में आम लोगों से ज्यादा कॉर्पोरेट घरानों का हित साधा जा रहा है।

क्रूड ऑयल और अंतरराष्ट्रीय दबाव

भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदा, जिससे घरेलू बाजार में कुछ राहत तो मिली, लेकिन अमेरिका इस नीति से नाराज़ दिखाई दिया। विश्लेषकों का कहना है कि इससे भारत पर निर्यात और मुद्रा के स्तर पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, कॉर्पोरेट जगत खासकर तेल और ऊर्जा क्षेत्र के बड़े घराने इससे फायदा उठा रहे हैं।

युद्ध और शांति पर दोहरे मानक?

पाकिस्तान के साथ तनाव के समय भारत ने अमेरिकी दबाव में आकर युद्ध विराम कर दिया। अब वही अमेरिका रूस से भारत की तेल खरीद पर आपत्ति जता रहा है। सवाल यह है कि क्या हमारी विदेश नीति स्वतंत्र और स्वायत्त है या फिर बाहरी दबावों में संचालित हो रही है।

निष्कर्ष

भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ लोकतंत्र, विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को लेकर गहन विमर्श की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता और लोकतांत्रिक परंपराओं को मज़बूत करे ताकि देश की दिशा सही राह पर बनी रहे।