फर्रुखाबाद,(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 जून 2025 प्रदेश शासन के कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश, कृषि भवन, लखनऊ द्वारा निर्गत आदेशों के क्रम में जनपद फर्रुखाबाद के समस्त थोक एवं फुटकर कीटनाशी विक्रेताओं को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश किसानों को गुणवत्तायुक्त कीटनाशी उपलब्ध कराने, बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और कीटनाशी अधिनियम 1968 व नियमावली 1971 के अनुपालन हेतु जारी किए गए हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि जिले के किसी भी कीटनाशी विक्रेता द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उनके विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। निर्देशों के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर बिक्री प्रतिबंधित – किसी भी स्थिति में विक्रेता निर्धारित अधिकतम मूल्य से अधिक दर पर कीटनाशी न बेचें।
2. बिना लाइसेंस विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध – अनाधिकृत रूप से कीटनाशी का उत्पादन, भंडारण, वितरण अथवा विक्रय गैरकानूनी है।
3. स्टॉक और बिक्री पंजिका अनिवार्य – प्रमाणित पंजिका में नियमित विवरण दर्ज किया जाए और निरीक्षण के समय प्रस्तुत किया जाए।
4. लाइसेंस पर अंकित कंपनियों के उत्पाद ही बेचें – अधिकृत कंपनियों के अतिरिक्त किसी अन्य कंपनी के उत्पाद बेचना वर्जित है।
5. संस्तुत फसल अनुसार ही कीटनाशी विक्रय – कृषकों को पक्की रसीद या कैश मेमो प्रदान करना अनिवार्य है।
6. नकली या कालातीत रसायनों की बिक्री पर सख्ती – नकली, अधोमानक या एक्सपायर्ड रसायन की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है।
7. लाइसेंस की प्रति व रेट बोर्ड दुकान में चस्पा करें – “ग्रो सेफ फूड” अभियान के पोस्टर भी लगाना आवश्यक है।
8. बिल-वाउचर सुरक्षित रखें – थोक विक्रेताओं अथवा निर्माता कंपनियों से प्राप्त सभी बिलों का सुरक्षित रिकॉर्ड रखें।
9. मासिक स्टॉक विवरण अनिवार्य – प्रत्येक माह के अंत में कम्पनीवार विवरण कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करें, अन्यथा लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा।
10. नवीन रसायनों की बिक्री से पहले प्रदर्शन अनिवार्य – नए उत्पादों की बिक्री से पूर्व छोटे स्तर पर प्रदर्शन करें और जिला कृषि रक्षा अधिकारी को सूचित करें।
जिला प्रशासन द्वारा अपील की गई है कि किसान भाई भी केवल पंजीकृत विक्रेताओं से ही कीटनाशी खरीदें, आवश्यक मात्रा में ही उपयोग करें और खरीद पर कैश मेमो अवश्य प्राप्त करें। यह कदम किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अहम साबित होगा।
