फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 05 दिसंबर 2025 कृषि भवन सभागार फर्रुखाबाद में आज विश्व मृदा दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक श्री अरविन्द मोहन मिश्र, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी, पर्यावरणविद् श्रीमती गुंजा जैन, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष श्री प्रशांत त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
उप कृषि निदेशक श्री अरविन्द मोहन मिश्र ने कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि जीवामृत, बीजामृत एवं घनजीवामृत जैसे जैविक उत्पाद किसान स्वयं तैयार कर सकते हैं या विकास खंड राजेपुर के ग्राम खण्डौली स्थित गौशाला से प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि—अत्यधिक रासायनिक खाद का उपयोग मृदा को नुकसान पहुंचाता है। लगभग 33% मिट्टी क्षरण, प्रदूषण व गलत खेती प्रथाओं की वजह से प्रभावित है। मृदा के सूक्ष्मजीवों के नष्ट होने से खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और जलचक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों से आग्रह किया गया कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग केवल मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर ही करें।
गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए वैज्ञानिक सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी ने रबी फसलों में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और कीटनाशकों के न्यूनतम प्रयोग पर जोर दिया।
उन्होंने किसानों से कहा कि—“कार्यक्रम में मिली जानकारी को केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि अन्य कृषकों को भी जागरूक करें।”
अत्यधिक रासायनिक उपयोग से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट
पर्यावरणविद् श्रीमती गुंजा जैन ने बताया कि जिले में आलू की खेती का क्षेत्रफल अधिक है, जहाँ किसान जरूरत से अधिक रासायनिक खाद और कीटनाशक इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि—इन रसायनों का दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पहुंचता है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। मृदा का स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है।
कृषकों ने ली मृदा संरक्षण की शपथ
अंत में कार्यक्रम में उपस्थित सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। साथ ही किसानों से अपील की गई कि अपने उपयोग हेतु प्राकृतिक एवं गौ-आधारित खेती अवश्य अपनाएँ।
