फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 18 मार्च 2026 जनपद के विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस इस बार विवादों में घिर गया। किसानों के लिए समस्याओं के समाधान और योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति ने इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अजय कटियार किसानों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे, लेकिन वहां की स्थिति देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि न तो जिला अधिकारी कार्यक्रम में पहुंचे और न ही अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी किसानों के बीच उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक माह के तीसरे बुधवार को किसान दिवस आयोजित करने का उद्देश्य किसानों की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन फर्रुखाबाद में यह कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है।
अजय कटियार ने बताया कि जो अधिकारी आते भी हैं, वे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। किसान अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ यह बताया जाता है कि समस्या का निस्तारण प्रक्रिया में है, बिना किसी निश्चित समय-सीमा के।
टीकाकरण पर भी उठे सवाल
किसानों ने पशुओं में खुरपका-मुंहपका बीमारी के टीकाकरण पर भी सवाल उठाए। आरोप है कि 22 जनवरी से 8 मार्च तक चले टीकाकरण अभियान में लाखों पशुओं का टीकाकरण कागजों में दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी सच्चाई कुछ और है। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
पेंशन घोटाले का आरोप
कार्यक्रम में राजेपुर ब्लॉक के ग्राम सभा चिड़िया महोलिया का मामला भी उठाया गया, जहां कुछ ग्रामीणों को मृत दिखाकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई। अजय कटियार ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की मिलीभगत से जीवित लोगों को मृत दर्शाकर उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा है।
सड़क जैसी बुनियादी समस्या भी अनसुलझी
जिला महासचिव अभय यादव ने बताया कि उनके गांव नगला फुलु में आजादी के 78 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं बनी है। इस मुद्दे को कई बार किसान दिवस में उठाया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।
विरोध की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अगली किसान दिवस बैठक तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे और संबंधित अधिकारियों का घेराव करेंगे।
इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष कृष्ण गोपाल मिश्रा, युवा जिलाध्यक्ष अनुज राजपूत, जिला सचिव सुशील दीक्षित सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
किसान दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का इस तरह औपचारिकता में सिमट जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी है कि जिम्मेदार अधिकारी न सिर्फ उपस्थित रहें, बल्कि गंभीरता से कार्रवाई भी सुनिश्चित करें।
