फर्रुखाबाद:आलू मंडी सातनपुर में किसानों का शोषण जारी, खुली बोली के बजाय गुप्त सौदे और तौल में हेराफेरी के गंभीर आरोप

फर्रूखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 दिसंबर 2025 जनपद की एशिया की सबसे बड़ी कही जाने वाली आलू मंडी सातनपुर एक बार फिर विवादों में है। किसानों द्वारा पिछले कुछ दिनों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें मंडी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

किसानों का कहना है कि मंडी में आलू की बिक्री खुली बोली के आधार पर नहीं हो रही है। आढ़ती और व्यापारी आज भी परंपरागत तरीके से अंगोछे के नीचे गुप्त सौदे कर रहे हैं, जिससे वास्तविक भाव किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और किसान मजबूरी में कम दाम पर अपना उत्पाद बेचने को विवश हैं।

दूसरी ओर, तौल व्यवस्था में भारी अनियमितता का आरोप भी किसानों ने लगाया है। किसानों के अनुसार पैकेट में आलू की 53 किलोग्राम की भर्ती होती है, लेकिन आढ़ती केवल 50 किलोग्राम का ही हिसाब दे रहे हैं, जिससे प्रत्यक्ष रूप से किसानों को नुकसान हो रहा है।

किसानों ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के बीच आपसी सहमति बनी थी कि यदि किसान ट्रॉली में ढीला आलू न लाकर पैकेट में भरकर लाएगा, तो 50 किलोग्राम पर 50 किलोग्राम का पूरा हिसाब दिया जाएगा। लेकिन इस वर्ष, समझौते के बावजूद, जब किसान पैकेट में आलू लेकर आ रहे हैं तब भी उन्हें पूरा वजन नहीं दिया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुविधाओं के नाम पर एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी कही जाने वाली सातनपुर मंडी किसानों के लिए लगभग शून्य साबित हो रही है। न तो सही तौल की गारंटी है, न पारदर्शी बोली व्यवस्था और न ही किसानों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई।

किसानों और किसान संगठनों की मांग है कि मंडी प्रशासन इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान ले, खुली बोली व्यवस्था को सख्ती से लागू करे, तौल प्रणाली की नियमित जांच हो तथा दोषी आढ़तियों व व्यापारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। अन्यथा किसानों का इस मंडी व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।

यह मामला न केवल सातनपुर मंडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि प्रदेश की मंडी व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता को भी उजागर करता है।