फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 07 जुलाई 2025 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर “मेरा युवा भारत – फर्रुखाबाद” द्वारा राम निवास महाविद्यालय, चित्रकूट गांधी में एक प्रेरणादायक आयोजन किया गया। इस अवसर पर “एक राष्ट्र, एक संविधान” विषय पर निबंध प्रतियोगिता एवं आपदा प्रबंधन पर विशेष संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री जयंत कुमार दीक्षित (सेवानिवृत्त आयुक्त, पीसीएस), महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रवीण कुमार त्रिपाठी, जिला युवा अधिकारी श्री शिखर रस्तोगी तथा NDRF के एएसआई श्री बृजमोहन सती द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।
इस अवसर पर डॉ. त्रिपाठी ने डॉ. मुखर्जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनकी विलक्षण विद्वता, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्र सेवा की भावना को प्रेरणादायक बताया। वहीं श्री शिखर रस्तोगी ने डॉ. मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का उनका उद्घोष आज भी युवाओं में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जगाता है।
निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रार्थना को प्रथम, नेहा को द्वितीय तथा नेहा एवं रोशनी को संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को ट्रॉफी और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) द्वारा आपदा प्रबंधन पर एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। एएसआई श्री बृजमोहन सती के नेतृत्व में टीम ने आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक उपायों, डूबते व्यक्ति को बचाने की विधियों और सीपीआर (CPR) का लाइव प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे छात्रों को व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम का सफल संचालन “मेरा युवा भारत” के युवा मंडल अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनारायण पाण्डेय एवं सुश्री उजाला द्वारा किया गया।
अंत में जिला युवा अधिकारी श्री शिखर रस्तोगी द्वारा मुख्य अतिथि श्री जयंत कुमार दीक्षित एवं प्राचार्य डॉ. त्रिपाठी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
यह आयोजन न केवल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना, बल्कि युवाओं को संविधान के महत्व, राष्ट्रीय एकता तथा आपदा प्रबंधन जैसे अहम विषयों के प्रति सजग एवं जागरूक बनाने का भी सशक्त प्रयास सिद्ध हुआ।
