फर्रुखाबाद:भाजपा विधायक सुशील शाक्य ने कायमगंज में जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया, तटबंध निर्माण का दिया आश्वासन

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 नवम्बर 2025 गंगा पार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तटबंध निर्माण की मांग को लेकर चल रहे आमरण अनशन का आज समापन हो गया। फर्रुखाबाद जिले के अमृतपुर क्षेत्र के भाजपा विधायक सुशील शाक्य ने स्वयं अनशन स्थल पर पहुंचकर अनशनकारियों को जूस पिलाकर और बूंदी खिलाकर अनशन खत्म कराया।

जानकारी के अनुसार, विधायक सुशील शाक्य आज दोपहर में कायमगंज क्षेत्र के ढाई घाट अनशन स्थल पहुंचे, जहां पिछले एक सप्ताह से ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे थे। तीन दिन पूर्व ही अनशनकारियों ने आमरण अनशन की घोषणा कर दी थी और चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे जल समाधि ले लेंगे।

विधायक श्री शाक्य ने मौके पर पहुंचे अधिकारियों की उपस्थिति में अनशनकारियों से ज्ञापन प्राप्त किया, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे जाने का उन्होंने आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गंगा पार क्षेत्र की विकराल बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान केवल तटबंध निर्माण से ही संभव है।

विधायक ने बताया कि अमृतपुर क्षेत्र में 22 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाया जाएगा, जिस पर लगभग 436 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसके निर्माण में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा। वहीं, शमशाबाद क्षेत्र में 27 किलोमीटर लंबा तटबंध प्रस्तावित है, जिसका सर्वे कराया जाएगा और उसका अलग इस्टीमेट तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि तटबंध बनने से गंगा किनारे के सैकड़ों गांवों को हर साल आने वाली बाढ़ और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।

अनशन खत्म कराने के दौरान एडीएम, एएसपी, सीओ, एसडीएम, तहसीलदार, थानाध्यक्ष समेत कई विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

आंदोलन के संयोजक एडवोकेट राजपाल यादव, जिला पंचायत सदस्य रामकुमार राठौर, नरेंद्र सिंह, कश्मीर सिंह, सत्येंद्र यादव सहित 21 लोगों ने आमरण अनशन में हिस्सा लिया था, जबकि सैकड़ों ग्रामीण उनके समर्थन में धरने पर बैठे रहे।

अनशन समाप्त होने के बाद उपस्थित ग्रामीणों ने विधायक सुशील शाक्य का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग जल्द ही पूरी होगी।

विधायक ने मीडिया से कहा “मैंने मुख्यमंत्री जी से इस मुद्दे पर बात करने का निर्णय लिया है। अमृतपुर और शमशाबाद क्षेत्र में तटबंध बनने से हजारों किसानों को बाढ़ की त्रासदी से स्थायी राहत मिलेगी।”

इस तरह ढाई घाट पर चल रहा यह ऐतिहासिक आंदोलन आखिरकार सकारात्मक दिशा में समाप्त हुआ, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।