फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 जुलाई 2025 ग्राम पट्टी प्रदुमन में हुई एक नृशंस घटना ने जिले भर में सनसनी फैला दी है। आरोप है कि थाना मोहम्मदाबाद के पिपरगांव निवासी मानवेंद्र यादव ने अपने साथियों के साथ मिलकर शाक्य परिवार की बेटियों पर लाठी-डंडों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमलावर को सत्तारूढ़ दल के कई बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिस कारण अब तक कोई कड़ी कार्यवाही नहीं हो सकी है।
हमला: क्या हुआ था उस दिन?
रामसिंह शाक्य, निवासी पट्टी प्रदुमन, ने बताया कि मंगलवार को अपने खेत पर मूंगफली खोद रहा था उनकी बेटियाँ घर से खेत पर आ रही थीं, तभी आरोपी मानवेंद्र यादव कुछ युवकों के साथ पहुंचा और खेत में भैंस घूंस दीं और नुकसान करबाने लगा मना करने पर बहस शुरू हो गई। बहस देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई और आरोपियों ने डंडों से हमला कर दिया। जिसमें रामसिंह शाक्य की एक पुत्री के सिर में गंभीर चोट आई है, जिसका इलाज डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल में चल रहा है।
पुलिस कार्यवाही पर सवाल
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने तत्काल मोहम्मदाबाद थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, परंतु आश्चर्यजनक रूप से अब तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही किसी आरोपी के विरुद्ध कोई ठोस एक्शन लिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “पुलिस दबाव में है और आरोपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
रामसिंह शाक्य और उनके समर्थकों का दावा है कि मुख्य आरोपी मानवेंद्र यादव भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का करीबी है। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने कहा: “मानवेंद्र यादव भाजपा के कार्यक्रमों में अकसर दिखाई देता है। यही कारण है कि प्रशासन हाथ बांधे बैठा है।”
पीड़ित परिवार और समाज का आक्रोश
घटना के बाद से ही शाक्य समाज और अन्य सामाजिक संगठनों में आक्रोश है। युवा शाक्य संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विवेक शाक्य ने लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो जिलेभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
विवेक शाक्य (युवा शाक्य संगठन):
“यह सिर्फ एक परिवार पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे समाज को डराने की कोशिश है। आरोपी चाहे किसी भी पार्टी से जुड़ा हो, उसे कानून के दायरे में लाना ही होगा।”
प्रशासन की चुप्पी
मोहम्मदाबाद थाना प्रभारी से जब पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। वहीं, जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि “जांच चल रही है और कानून के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।”
सवाल उठते हैं:
1. क्या आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है?
2. पुलिस की निष्क्रियता क्यों?
3. क्या न्याय केवल आम लोगों के लिए है, नेताओं के करीबियों के लिए नहीं?
समाज और मीडिया की भूमिका
इस मामले ने स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर खूब तूल पकड़ा है। आम जनता की मांग है कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और कोई भी व्यक्ति राजनीतिक हैसियत के आधार पर कानून से ऊपर न हो।
हमारी अपील:
प्रशासन इस प्रकरण को गंभीरता से ले और तत्काल दोषियों को गिरफ्तार कर न्याय सुनिश्चित करे। साथ ही यदि कोई राजनैतिक व्यक्ति दोषी को संरक्षण दे रहा है, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।
