फर्रुखाबाद:जल निगम कर्मियों और पेंशनरों की समस्याओं पर उमड़ा आक्रोश, प्रदेश भर में मौन धरना प्रदर्शन,सौपा ज्ञापन।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 04 जुलाई 2025 उत्तर प्रदेश जल निगम के हजारों कर्मी और पेंशनर विगत छह महीनों से वेतन और पेंशन की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। इस स्थिति से त्रस्त जल निगम परिवार ने एक बार फिर अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर मौन धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। शुक्रवार, 04 जुलाई को कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर ड्यूटी की और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं।

मुख्य समस्याएं और मांगें

जल निगम कर्मियों और पेंशनरों की ओर से मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में निम्न समस्याओं और मांगों का विस्तार से उल्लेख किया गया:

1. वेतन और पेंशन में बकाया – विगत छह माह का वेतन और पेंशन अब तक नहीं दिया गया है। इसे एकमुश्त भुगतान कर भविष्य में वेतन-पेंशन का समयबद्ध भुगतान ट्रेजरी के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।

2. महंगाई भत्ते में विसंगति – वर्तमान में 252 प्रतिशत की जगह 212 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है, जिसे अद्यतन किया जाए।

3. सातवां वेतनमान लागू करने की मांग – दोनों निगमों में सप्तम वेतनमान तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

4. एरियर भुगतान की गड़बड़ियां – सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद सभी कर्मियों को षष्ठम वेतनमान का एरियर नहीं मिला है। कुछ को बिना सर्विस बुक के आधा अधूरा भुगतान किया गया है।

5. अनुकम्पा नियुक्तियों की बहाली – वर्ष 2021 से बंद अनुकम्पा नियुक्तियों को पुनः चालू किया जाए।

6. कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था लागू हो – चिकित्सा प्रतिपूर्ति नियमों में संशोधन कर कैशलेस व्यवस्था लागू की जाए।

7. जल निगमों का एकीकरण हो – नगरीय और ग्रामीण जल निगमों का एकीकरण प्रशासनिक सुगमता और वित्तीय सुधार के लिए आवश्यक बताया गया।

जल निगम परिवार में गहराता असंतोष

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कभी जल निगम में 26,000 कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 5,060 रह गई है। बावजूद इसके, नियमित वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है और कर्मचारियों को कई वर्षों से बोनस, पदोन्नति और अन्य सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है।

आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि विगत पांच वर्षों से जल निगम प्रशासन और शासन के उच्च अधिकारी संगठनों से वार्ता तक करने को तैयार नहीं हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अब कर्मी और पेंशनर आशान्वित हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस संकट का संज्ञान लेकर शीघ्र समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।