फर्रुखाबाद:जनपद में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता, ओवर रेटिंग व डींपिंग पर प्रशासन सख्त।

(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 जुलाई 2025 जनपद में खरीफ फसल के वर्तमान सीजन के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके व पोटाश जैसे उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है। किसानों को किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, ओवररेटिंग या डींपिंग से बचाने के लिए जिला प्रशासन व कृषि विभाग द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

जिला कृषि अधिकारी श्री वी.के. सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जनपद को विभिन्न स्रोतों से कुल 1,82,000 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हो चुकी है, जिसमें से अब तक लगभग 1,24,000 मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री हो चुकी है। इसके अतिरिक्त डीएपी, एनपीके और पोटाश की भी समुचित आपूर्ति की जा चुकी है। जुलाई माह के पहले सप्ताह में 13 जुलाई तक कुल 873.53 मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री दर्ज की गई है।

खरीफ फसलों हेतु उर्वरक उपयोग की अनुशंसित मात्रा

रबी व खरीफ फसलों के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के तहत यूरिया, डीएपी व पोटाश के उपयोग की वैज्ञानिक मात्रा का भी उल्लेख किया गया है। उदाहरणस्वरूप, धान की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किग्रा नाइट्रोजन (यूरिया) व 40 किग्रा फास्फोरस (डीएपी) की आवश्यकता बताई गई है। इसी प्रकार आलू की फसल हेतु यूरिया 240 किग्रा प्रति हेक्टेयर उपयोग की सलाह दी गई है।

उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने हेतु सतर्कता निर्देश

जनपद में कोई भी विक्रेता यूरिया/डीएपी की ओवर रेटिंग, होर्डिंग या डींपिंग नहीं करेगा। कोई भी विक्रेता बिना कंप्यूटराइज्ड बिल दिए खाद नहीं बेच सकेगा। सभी विक्रेताओं को मूल्य सूची प्रदर्शित करने व पोस मशीन के माध्यम से बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी विक्रेता द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय किया जाता है, तो उसे उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 व आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

किसानों से अपील

जिला कृषि अधिकारी ने सभी किसानों से अपील की है कि वे अधिक मूल्य पर उर्वरक क्रय न करें और बिल अवश्य प्राप्त करें। यदि कहीं भी कालाबाजारी या अनियमितता दिखे तो तुरंत कृषि विभाग या तहसील प्रशासन को सूचित करें। यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी विकास खंडों के उप कृषि अधिकारियों, बीज गोदाम प्रभारी व निरीक्षण टीमों को सतर्क किया गया है ताकि किसानों को समय से आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो सके।