फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 अगस्त 2025 बासमती चावल के कीटनाशी अवशेषमुक्त उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ा कदम उठाया है। शासन ने बासमती चावल की खेती में प्रयोग होने वाले 11 कीटनाशकों की बिक्री, वितरण और उपयोग पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 1 अगस्त 2025 से आगामी 60 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद के अनुसार, कीटनाशी अधिनियम 1968 की धारा 27(1) के तहत यह प्रतिबंध लागू किया गया है। प्रतिबंधित कीटनाशकों में ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफॉस, टेबुकोनोजोल, प्रोपीकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वेण्डाजिम एवं कार्बोफ्यूरान शामिल हैं।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया कि बासमती चावल का निर्यात यूरोपीय संघ, अमेरिका और खाड़ी देशों जैसे बड़े आयातक बाजारों में कड़े मानकों के कारण प्रभावित हो रहा है। अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) पार होने की वजह से भारतीय बासमती की मांग घटी है और इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले दाम पर पड़ा है। इसी कारण इन 11 कीटनाशकों को प्रतिबंधित कर वैकल्पिक विकल्प सुझाए गए हैं।
वैकल्पिक कीटनाशक
किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए विभाग ने वैकल्पिक रसायनों की सूची भी जारी की है। उदाहरण के तौर पर—
ट्राइसाइक्लाजोल, प्रोपीकोनाजोल व कार्वेण्डाजिम की जगह स्यूडोमोनास 0.5% WP व डाइफेनोकोनाजेल 25% EC का प्रयोग किया जा सकता है।
एसीफेट और क्लोरपाइरीफॉस की जगह फिप्रोनिल 5% SC एवं बाईफेन्थिन 10% SC।
इमिडाक्लोप्रिड व कार्बोफ्यूरान के स्थान पर कारटाफ हाइड्रोक्लोराइड 4% GR और फिप्रोनिल 0.3% GR का प्रयोग किया जा सकता है।
विभाग की अपील
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों और निजी कीटनाशी विक्रेताओं से अपील की है कि वे दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन करें। इससे बासमती चावल का स्वस्थ्य एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की मांग बढ़ेगी।
यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा बल्कि भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और निर्यात बाजार को भी मजबूती देगा।
